झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के कदम आगे बढ़ने के बावजूद अगले दो दिनों तक इसके कमजोर रहने के आसार हैं। इसी बीच, प्रशांत महासागर में अलनीनो (El Nino) की सक्रियता ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है।
झारखंड में शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दस्तक दे दी। मानसून संथाल परगना और कोल्हान क्षेत्र के रास्ते राज्य में प्रवेश किया, जिसके बाद दुमका, साहिबगंज, पाकुड़, गोड्डा, जामताड़ा, पूर्वी सिंहभूम और गिरिडीह के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश दर्ज की गई।
झारखंड में 7 से 10 जून के बीच मानसून पहुंच सकता है। मौसम विभाग ने जानकारी दी है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अंडमान-निकोबार तक पहुंच चुका है और 7 से 10 जून के बीच संताल परगना के रास्ते झारखंड में प्रवेश करेगा।
झारखंड में मॉनसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र ने मॉनसून को और भी अधिक प्रभावित किया है।
1951 में 46 फीसदी आदिवासियों की आबादी थी। अब यह घटकर 22 फीसदी रह गई है। मुस्लिमों की संख्या बांग्लादेशियों के कारण बढ़ी है। आनेवाले समय में आदिवासियों को खोजना पड़ेगा।
मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक, झारखंड में मानसून सक्रिय है। इसका असर दिख रहा है। शनिवार को 8 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है।
मानसून की हवा पूरे झारखंड में फैल गयी है। राज्य के कई हिस्सों में बारिश शुरू हो गयी। 21 जून संताल के रास्ते मॉनसून ने राज्य में कदम रखा था।
झारखंड के कई जिलों में मॉनसून का प्रवेश होना बाकी है। इन जिलों के लोग मॉनसून का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। बुधवार को लोहरदगा, सिमडेगा, गुमला समेत कई जिलों में अच्छी बारिश हुई।
मौसम विज्ञान केंद्र रांची के मुताबिक, झारखंड के सभी जिलों में 26 जून (बुधवार) से 29 जून (शनिवार) तक भारी बारिश होगी।
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