सीट बंटवारे पर सहमति बनने के बाद जहां बीजेपी और जेडीयू ने बराबर-बराबर 101 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था, वहीं अब नीतीश कुमार के कदम ने इस समझौते की जड़ें हिला दी हैं।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान 31 अगस्त 2025 को पटना में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) मतदाताओं के दस्तावेज़ों की जांच करते हुए।
नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट ने भारत के रोजगार बाज़ार को लेकर एक साथ चेतावनी और उम्मीद दोनों पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले पांच वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से देश के टेक सेक्टर से करीब 20 लाख नौकरियां खत्म हो सकती हैं।
संसार में रहते हुए भी ईश्वर के साथ एकात्मता: लाहिड़ी महाशय का प्रेरणास्पद जीवन, योगावतार जिन्होंने हमारे मध्य विचरण किया।
आपके अंतर्मन को झकझोर देने वाली यह एक सच्ची कहानी है। ज़रा सोचिए, जब 15 अगस्त 1947 को भारत जैसे 35 करोड़ की आबादी वाले देश को आज़ादी मिली, तो उसके कुछ ही दिन बाद 20 लाख से अधिक लोगों को आज़ाद न किया गया। जिस वक्त पूरा देश जश्न में डूबा था, उस समय एक पूरा
दीमा हसाओ का उदाहरण झारखंड के लिए सबक है। पिछले दिनों गुवाहाटी उच्च न्यायालय उस समय स्तब्ध रह गया जब यह सामने आया कि असम सरकार और दीमा हसाओ स्वायत्तशासी जिला परिषद (एनसीएचएसी) ने कोलकाता की महाबल सीमेंट कंपनी को 3,000 बीघा (लगभग 992 एकड़) ज़मीन आवंटित कर
दीमा हसाओ का उदाहरण झारखंड के लिए सबक है। पिछले दिनों गुवाहाटी उच्च न्यायालय उस समय स्तब्ध रह गया जब यह सामने आया कि असम सरकार और दीमा हसाओ स्वायत्तशासी जिला परिषद (एनसीएचएसी) ने कोलकाता की महाबल सीमेंट कंपनी को 3,000 बीघा (लगभग 992 एकड़) ज़मीन आवंटित कर
इन आंकड़ों को देखिये, 30% सोना — माली, बुर्किना फासो, घाना, तंज़ानिया —सोना नदियों की तरह बहता है, लेकिन लोग गरीबी में तैरते हैं।
बिहार और देश भर में मतदाता पुनरीक्षण (SIR) पर छिड़े संग्राम के बीच देश के नेता प्रतिपक्ष 'राहुल गांधी' बिहार आ रहे हैं। वैसे तो उनका कार्यक्रम 9-10 अगस्त से ही तय था लेकिन अब वे अपने दौरे की शुरुआत 17 अगस्त को करेंगे।
आज झारखंड आंदोलन के प्रखर सेनानी, जन-जन के नेता, और राज्य सरकार में पूर्व शिक्षा मंत्री स्वर्गीय टाइगर जगरनाथ महतो की जयंती पर समूचा झारखंड उन्हें नम आंखों से याद कर रहा है।
छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा से लेकर झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों तक फैले आदिवासी समाज में उत्तराधिकार का अधिकार अब तक पुरुषों तक सीमित रहा है। ‘हमारी बहन-बेटियाँ हमारी अमानत हैं, लेकिन ज़मीन पर उनका हक नहीं’ यह कथन कई आदिवासी समुदायों की
अगर आप सोचते हैं कि अंग्रेजी ही एक ऐसी भाषा से जिससे दुनिया में लोगों से बात कर सकते हैं तो आप यहां पर थोड़े से गलत हो सकते हैं।