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Gumla wild elephant : गुमला में हाथियों से बढ़ा खतरा, DFO ने दी लोगों को खास सलाह

गुमला में हाथियों से बढ़ा खतरा, DFO ने दी लोगों को खास सलाह

द फॉलोअप डेस्क:

Jharkhand News: गुमला (Gumla) जिले के विभिन्न इलाकों में जंगली हाथियों की सक्रियता के कारण आम लोगों में काफी भय का माहौल बना रहता है। कई बार लोग गलती से जंगली हाथियों (wild elephant) की चपेट में आ जाते हैं, जिससे उन्हें काफी नुकसान झेलना पड़ता है। साथ ही, कई बार जंगली हाथियों से अपनी फसल को बचाने के चक्कर में लोग अपनी जान तक गंवा देते हैं। जंगली हाथियों की सक्रियता के बाद वन विभाग की टीम पूरी ईमानदारी के साथ उन्हें भगाने में लगी रहती है, लेकिन लोगों को कई बार सही रूप से जानकारी नहीं मिल पाने के कारण उनकी सक्रियता उन्हें बेवजह परेशान कर देती है। डीएफओ अहमद बिलाल अनवर (DFO Ahmad Bilal Anwar) की मानें तो उनका प्रयास है कि जंगली हाथियों की सक्रियता के बाद जहां लोगों की जान-माल की क्षति को बचाया जा सके, वहीं अगर किसी प्रकार से कोई नुकसान होता है तो ग्रामीणों को सरकार की ओर से भरपूर सहायता दी जाती है। 

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हाथी के हमले में मौत पर 10 लाख का मुआवजा

ऐसे में लोगों को बहुत ज्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। पहले तो वन विभाग यह प्रयास करता है कि किसी प्रकार का कोई नुकसान न हो और अगर नुकसान होता भी है तो उसका उचित मुआवजा मिले, ताकि पीड़ित परिवारों को बहुत ज्यादा आर्थिक नुकसान न हो सके। इन तमाम चीजों की जानकारी देते हुए डीएफओ अहमद बिलाल अनवर ने बताया कि अगर जंगली हाथी की चपेट में आकर किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उसे 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। मृत्यु होने के तीन दिन के अंदर 1 लाख रुपये की मदद दी जाती है और दो सप्ताह के अंदर 4 लाख रुपये का चेक भुगतान किया जाता है। वहीं, मृतक के आश्रित के नाम पर शेष 5 लाख रुपये की 5 वर्षों के लिए बैंक में एफडी कर दी जाती है और वह पैसा उसके आश्रित को समय पर उपलब्ध हो जाता है। इसके साथ ही पीड़ित परिवार को सहायता राशि के रूप में 2,000 रुपये प्रति महीना बैंक के माध्यम से भुगतान किया जाता है।

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चोट, मकान और फसल के नुकसान पर मिलेगी मदद

वहीं, अगर जंगली जानवर से व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो जाए तो उसे 2 लाख रुपये और हल्की चोट लगने पर 35,000 रुपये दिए जाते हैं। पूर्ण रूप से मकान के क्षतिग्रस्त होने पर 2 लाख रुपये, पक्के मकान के लिए डेढ़ लाख रुपये और साधारण मकान में 1 लाख 30 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाती है। वहीं, जंगली जानवर द्वारा भंडारित अनाज की प्रतिपूर्ति के लिए 3,600 रुपये प्रति क्विंटल सहित कई तरह के भुगतान दिए जाते हैं। ऐसे में लोगों को किसी प्रकार से परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। उनकी फसल के नुकसान के साथ-साथ जान-माल और घरों के नुकसान को लेकर सरकार द्वारा प्राप्त मुआवजा उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में कभी भी जंगली जानवर अगर उनके इलाके में सक्रिय हो जाए तो उनसे ज्यादा भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है और न ही उनके नजदीक जाने की आवश्यकता है। डीएफओ ने स्पष्ट बताया कि कभी भी अगर इलाके में जंगली जानवर सक्रिय हो जाएं तो इसकी सीधी सूचना वन विभाग के कर्मियों या सीधे वन प्रमंडल पदाधिकारी को दी जा सकती है।

सेल्फी के चक्कर में न बढ़ाएं खतरा, हाथियों से रहें दूर

इन तमाम मुद्दों को लेकर डीएफओ अहमद बिलाल अनवर ने संवाददाता से खास बातचीत की है, जिसमें उन्होंने सारी बातों की जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि सरकार जहां आम लोगों के लिए चिंतित है, वहीं जंगली हाथी भी कैसे सुरक्षित रहें, इस बात को लेकर भी लगातार चिंतित है। डीएफओ अहमद बिलाल अनवर ने बताया कि कई बार देखने को मिलता है कि लोगों के द्वारा जंगली हाथियों के इलाके में सक्रिय होने के बाद ज्यादा उत्साह दिखाया जाता है। कई बार हाथी के समीप जाकर लोग सेल्फी लेने का प्रयास करते हैं या फिर उसका पीछा करते हैं। लोग कई बार उसके शरीर पर पत्थर मारते हैं और कई बार उसके आसपास बेवजह की भीड़ बना देते हैं, जिसके कारण हाथी सक्रिय हो जाता है और लोगों को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जंगली हाथियों के बारे में एक बात आप लोग समझ लें कि जंगली हाथी हमेशा उसी रास्ते से आवागमन का प्रयास करता है, जिस रास्ते से वह वर्षों से आता-जाता रहा है। उस इलाके में अगर लोगों की सक्रियता बढ़ेगी तो निश्चित रूप से उसका खतरा बढ़ जाता है।

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हाथियों की सुरक्षा पर वन विभाग की पैनी नजर

वहीं, उन्होंने बताया कि हम लोगों का प्रयास होता है कि अगर जंगली हाथियों की सक्रियता गुमला जिले में है और वह हाथी गुमला जिले से निकलकर रांची या खूंटी या लातेहार चला गया है तो संबंधित इलाके के डीएफओ को उसकी जानकारी दी जाती है, ताकि उस इलाके के डीएफओ भी इस मामले को लेकर सतर्क रहें और जंगली हाथी जंगल में ही रहे तथा किसी आवासीय क्षेत्र में जाकर किसी को नुकसान न पहुंचाएं। ऐसे में वन विभाग का पूरा प्रयास रहता है कि जंगली हाथियों की सुरक्षा को भी ध्यान में रखा जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार ने जिस तरह से मुआवजे की दर को बेहतर तरीके से स्थापित करने के लिए नए मुआवजे की दर निर्धारित की है, ऐसे में लोगों को बहुत ज्यादा चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि वन विभाग तो पूरा प्रयास करता है कि किसी प्रकार की कोई घटना न घटे, लेकिन घटनाएं अगर घटती भी हैं तो उसमें होने वाले आर्थिक नुकसान को ध्यान में रखते हुए सरकार के द्वारा प्रॉपर रूप से सभी को मुआवजा उपलब्ध कराया जाता है।

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