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साबरमती का संत-34: महात्‍मा गांधी, कांग्रेस और लोकसेवक संघ

गांधी और कांग्रेस के रिश्ते को समझना आसान नहीं है। गांधी का लिखा कहा एक तरह से, बल्कि सभी तरह से, एक पिता का संतान पीढ़ी के लिए लिखा संदेश या वसीयत है।

शक्ति वामा-3: स्त्री के आदिम और गृहस्थ रूपों के बीच की दुर्गा करूणामयी है, तो कभी संहारक भी

स्त्री-शक्ति की उपासना के नौ-दिवसीय आयोजन नवररात्रि की शुभकामनाएं,

साबरमती का संत-33: जब वाल्मिकी बस्ती में बापू बने मास्टरजी

''महात्मा गांधी के नोआखाली और कोलकाता में सांप्रदायिक दंगों को खत्म करवाने के बारे में बार-बार लिखा जाता है। पर उन्होंने यही काम दिल्ली में भी किया था। अजीब सी बात है कि इसकी अधिक चर्चा नहीं होती। इसके साथ ही वे दिल्ली में शिक्षक भी बने। उन्होंने दिल्ली क

शक्ति वामा-2: देवी को ईश्वर के रूप में पूजने वाला दुनिया का  संभवतः एकमात्र शाक्त धर्म

'प्राचीन काल से ही हिन्दू धर्म तीन मुख्य संप्रदायों में बंटा रहा है  - विष्णु का उपासक वैष्णव, शिव का उपासक शैव और शक्ति का उपासक शाक्त संप्रदाय। दुनिया के सभी दूसरे धर्मों की तरह वैष्णव और शैव  संप्रदाय जहां सृष्टि की सर्वोच्च शक्ति पुरुष को मानते हैं, श

लखीमपुर खीरी हत्याकांड की तुलना जलियावाला बाग हादसे से करना कितना सही

'केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र के नेतृत्व में तेज रफ़्तार गाड़ियों का  एक काफिला प्रदर्शनकारी किसानों को कुचलते हुए निकल गया, जिससे अनेक किसानों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। दर्जनों लोग बुरी तरह घायल हैं।

साबरमती का संत-32: उसने गांधी को क्यों मारा-पड़ताल

'मैंने भी इस किताब के एक खंड को बहुत पहले पढ़ा था। खंड का नाम है- ‘अहिंसा और हमलों के बीच निर्भय जीवन : जनवरी 1948 से गांधी पर हुए हमले. इसी खंड में एक अध्याय है- ‘जाति-नस्ल-निष्ठा और गांधी।’

दुर्गापूजा, दशहरा और बाबूजी का नवाह पाठ

'प्राचीन काल से स्त्री के हर स्वरूप को हम पूजते आये हैं| महाभारत काल की एक सशक्त स्त्री  जिसके एक निर्णय ने इतिहास की दिशा और कुरुवंश की दशा ही बदल दी, उसकी चर्चा करना  ऐसे समय में तो बनती है न जिस समय में सब मातृशक्ति की उपासना कर रहे हैं| मातृशक्ति का आ

15वां स्मृति दिवस: राजनीति का बेमिसाल रसायनशास्त्री, जिन्हें मान्यवर कहा गया

'कांशीराम ने जब अपनी सामाजिक-राजनीतिक यात्रा शुरू की, तो उनके पास पूंजी के तौर पर सिर्फ एक विचार था। यह विचार भारत को सही मायने में सामाजिक लोकतंत्र बनाने का विचार था, जिसमें अधिकतम लोगों की राजकाज में अधिकतम भागीदारी का सपना सन्निहित था। कांशीराम अपने भा

विवेक का स्वामी-अंतिम: संघ और स्वामी विवेकानंद का हिंदुत्व कितना पास, कितना दूर 

'भारत के वामपंथियों को अन्य किसी भारतीय विचारक के मुकाबले नेहरू की धर्मनिरपेक्षता तुलनात्मक दृष्टि से पसंद रही है। उन्होंने उसकी मुखालफत भी नहीं की। वे यह भी कहते हैं कि संवैधानिक देशभक्ति में भरोसा रखना चाहिए। संघ परिवार और भाजपा के बड़े नेताओं ने विवेकान

साबरमती का संत-31: गांधी पाठशाला में महात्मा से मुठभेड़

भारतीय लोकतंत्र के जनवादी आन्दोलन के संदर्भ में मिथकों के नायक राम और कृष्ण के बाद कालक्रम में तीसरे स्थान पर गांधी ही खड़े होते हैं, कई अर्थों में उनसे आगे बढ़कर उन्हें संशोधित करते हुए। इस देश में ऐसा कोई व्यक्ति पैदा नहीं हुआ जिसने गांधी से ज़्यादा शब्द

साबरमती का संत-30: गांधी दर्शन-समरसता की बुनियाद पर टिकी अर्थव्यवस्था और राजनीति

गांधी जी द्वारा राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था के विकेंद्रीकरण और मशीनों के नकार का आग्रह अनायास नहीं था। उनकी यह दृढ़ मान्यता थी कि लोकतंत्र मशीनों यानी कि प्रौद्योगिकी एवं उत्पादन के केंद्रीकृत विशाल संसाधनों यानी कि उद्योग का दास होता है। गांधी जी यह जानते

साबरमती का संत-29: महात्मा गांधी का संकल्प- खादी आत्म निर्भरता का विकल्प

'किसी को समय बडा बनाता है और कोई समय को बडा बना देता है।कुछ लोग समय का सही मूल्यांकन करते हैंऔर कुछ लोग आने वाले समय का पूर्वाभास पा जाते हैं। कुछ लोग अतीत को परत दर परत तोड़कर उसमें वर्तमान के लिए ऊर्जा एकत्र करते हैं और कुछ लोग वर्तमान की समस्याओं से घबर

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