द फॉलोअप डेस्क:
Jharkhand News: झारखंड (Jharkhand) कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC की CGL-2023 परीक्षा के पेपर लीक (Paper Leak) और धांधली मामले में CID की जांच में आरोपी राहुल कुमार (Rahul Kumar) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। CID की ओर से कोर्ट में पेश किए गए साक्ष्यों के मुताबिक, राहुल कुमार सिर्फ इस परीक्षा का एक परीक्षार्थी नहीं था, बल्कि उसका संबंध उस एजेंसी से भी था, जिसे परीक्षा के गोपनीय काम की जिम्मेदारी दी गई थी। जांच में सामने आया है कि राहुल कुमार को प्रश्नपत्र और OMR शीट की छपाई, पैकिंग और उससे जुड़े काम की जानकारी और पहुंच हासिल थी।
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मानेसर प्रिंटिंग प्रेस में राहुल की मौजूदगी के सबूत
CID के मुताबिक, राहुल कुमार ICN India Private Limited से जुड़ा था। इसी एजेंसी को JSSC CGL-2023 परीक्षा के प्रश्नपत्रों की सेटिंग, प्रिंटिंग, OMR शीट की छपाई और पैकेजिंग जैसे महत्वपूर्ण काम सौंपे गए थे। जांच में यह भी सामने आया कि राहुल कुमार ने हरियाणा के मानेसर स्थित प्रिंटिंग फैसिलिटी में प्रश्नपत्रों की छपाई, सुपरविजन और पैकेजिंग के काम में सीधे तौर पर हिस्सा लिया था। यानी एक तरफ वह परीक्षा में शामिल होने वाला अभ्यर्थी था और दूसरी तरफ परीक्षा से जुड़ी गोपनीय प्रक्रिया का हिस्सा भी था। राहुल की मानेसर स्थित प्रिंटिंग फैसिलिटी में मौजूदगी को लेकर CID ने डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए हैं। जांच के अनुसार, फैक्ट्री रजिस्टर में राहुल कुमार की एंट्री दर्ज है। इसके अलावा उसके मोबाइल नंबर 7677958256 के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन एनालिसिस से भी संबंधित समय में उसके मानेसर स्थित प्रिंटिंग फैसिलिटी में मौजूद होने की पुष्टि हुई है।

राहुल के WhatsApp से उत्तर कुंजी फॉरवर्ड होने का आरोप
जांच में एक और अहम बात सामने आई है। CID के अनुसार, परीक्षा से पहले WhatsApp के जरिए प्रश्नपत्र और उत्तर-कुंजी जैसी गोपनीय सामग्री का आदान-प्रदान किया गया था। आरोप है कि राहुल कुमार ने अपने मोबाइल पर यह सामग्री हासिल की और WhatsApp के जरिए उसे आगे फॉरवर्ड भी किया। CID का दावा है कि इस तरह परीक्षा की गोपनीयता प्रभावित हुई और पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क को मदद मिली। जांच एजेंसी के मुताबिक, राहुल कुमार के संपर्क इस मामले के दूसरे आरोपियों से भी पाए गए हैं। CID के अनुसार, वह मुख्य आरोपी सोमंश प्रकाश का फ्लैटमेट था। इसके अलावा सेटिंग सिंडिकेट से जुड़े मिथिलेश सिंह, समीर, नवीन किशोर और अन्य लोगों के साथ भी उसके संपर्क और कथित साठगांठ के साक्ष्य जांच में सामने आए हैं। अब कोर्ट में पेश किए गए इन साक्ष्यों के आधार पर यह मामला आगे बढ़ रहा है और जांच एजेंसी की ओर से आरोपियों की भूमिका को लेकर और तथ्य सामने रखे जा रहे हैं।
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