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झारखंड हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति 2016 की जांच तेज, JSSC और शिक्षा विभाग से मांगा पूरा रिकॉर्ड

झारखंड हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति 2016 की जांच तेज, JSSC और शिक्षा विभाग से मांगा पूरा रिकॉर्ड

रांची: 
Jharkhand News: झारखंड (Jharkhand) में वर्ष 2016 की हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति (High School Teacher Recruitment) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं (Irregularities) को लेकर जांच तेज हो गई है। 600 से अधिक अभ्यर्थियों (Candidates) की शिकायतों के बीच झारखंड हाइकोर्ट (Jharkhand High Court) के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमीशन (Fact-Finding Commission) ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (School Education and Literacy Department) से नियुक्तियों से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड (Records) तलब किया है। कमीशन ने संशोधित राज्यस्तरीय मेधा सूची (Revised State-Level Merit List), अभ्यर्थियों के प्राप्तांक (Marks), नियुक्ति की अनुशंसाओं (Appointment Recommendations), जिलावार रिक्तियों (District-Wise Vacancies) और जिम्मेदार अधिकारियों (Responsible Officials) से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी है। दोनों पक्षों को एक सप्ताह के भीतर बिंदुवार जवाब (Point-Wise Reply) और जरूरी दस्तावेज (Documents) जमा करने का निर्देश दिया गया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि राज्यस्तरीय मेधा सूची (State-Level Merit List) तैयार किए बिना नियुक्तियां (Appointments) की गईं और कुछ मामलों में उनसे कम अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को नौकरी दे दी गई। अब कमीशन इन आरोपों की जांच के लिए चयन प्रक्रिया (Selection Process) से लेकर नियुक्ति तक के रिकॉर्ड का मिलान (Verification) करेगा। मामले की अगली सुनवाई (Next Hearing) 14 अक्टूबर 2026 को दोपहर तीन बजे पुराने हाईकोर्ट परिसर (Old High Court Campus) में निर्धारित है।

600 से अधिक अभ्यर्थियों ने नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल
6 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने 600 से अधिक अभ्यर्थियों का पक्ष रखा। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति में राज्यस्तरीय मेधा सूची के आधार पर चयन नहीं किया गया। उनका कहना है कि संबंधित विषय और श्रेणी में उनसे कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्त कर दिया गया, जबकि अधिक अंक पाने के बावजूद वे नियुक्ति से वंचित रह गए। सुनवाई के दौरान अन्य अधिवक्ताओं ने भी इसी तरह की शिकायतें सामने रखीं। सभी याचिकाकर्ताओं के व्यक्तिगत बयान दर्ज करना व्यावहारिक रूप से कठिन होने के कारण कमीशन ने उनके अधिवक्ताओं से निर्धारित प्रारूप में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।

याचिकाकर्ताओं को देने होंगे अभ्यर्थियों के अंक और नियुक्ति का विवरण
कमीशन ने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं से प्रत्येक प्रभावित अभ्यर्थी का नाम, रोल नंबर, विषय, श्रेणी और प्राप्तांक मांगा है। इसके साथ ही, उस नियुक्त अभ्यर्थी का नाम, रोल नंबर, विषय, श्रेणी, प्राप्तांक, नियुक्ति की तारीख और जिला भी बताना होगा, जिसके चयन पर संबंधित अभ्यर्थी ने सवाल उठाया है। इस जानकारी के जरिए कमीशन यह जांचना चाहता है कि समान विषय और श्रेणी में अभ्यर्थियों के अंकों तथा नियुक्तियों के बीच क्या अंतर रहा। उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि नियुक्तियां राज्यस्तरीय मेधा सूची के अनुरूप हुई थीं या नहीं।

JSSC से संशोधित राज्यस्तरीय मेधा सूची पर मांगा जवाब
कमीशन ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से वर्ष 2016 की प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (TGT) भर्ती परीक्षा से जुड़ी कई अहम जानकारियां मांगी हैं। आयोग को विषयवार यह बताना होगा कि कितने अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए और कितने के परिणाम घोषित किए गए। परिणाम आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किए गए थे या नहीं, इसकी जानकारी भी देनी होगी। इसके अलावा, अनुसूचित क्षेत्रों के 13 जिलों में स्थानीय अभ्यर्थियों को आरक्षण देने से संबंधित अधिसूचना रद्द होने और सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2 अगस्त 2022 को इस स्थिति की पुष्टि किए जाने के बाद संशोधित राज्यस्तरीय मेधा सूची तैयार की गई थी या नहीं, इस पर भी जवाब मांगा गया है। JSSC को संबंधित मेधा सूची, नियुक्ति की अनुशंसाओं और इस प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के नाम उपलब्ध कराने होंगे। उस समय आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और परीक्षा नियंत्रक के नाम एवं पद संबंधी विवरण भी मांगे गए हैं।

शिक्षा विभाग को नियुक्तियों और रिक्तियों का पूरा हिसाब देना होगा
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से 2 अगस्त 2022 के बाद प्राप्त नियुक्ति अनुशंसाओं की तारीख और उनकी प्रतियां मांगी गई हैं। विभाग को नियुक्त अभ्यर्थियों की विषयवार और श्रेणीवार सूची के साथ उनके प्राप्तांक, नियुक्ति की तारीख और संबंधित जिले का विवरण भी देना होगा। कमीशन ने राज्यस्तरीय मेधा सूची से बाहर किए गए अभ्यर्थियों की नियुक्ति से जुड़े मामलों पर भी जानकारी मांगी है। विभाग को बताना होगा कि ऐसे मामलों में नियुक्ति क्यों की गई और इसके लिए कौन-कौन से अधिकारी जिम्मेदार थे। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2019 में पद पर योगदान नहीं देने वाले अभ्यर्थियों के स्थान पर की गई नियुक्तियों तथा पहले खारिज किए गए अभ्यर्थियों की बाद में हुई नियुक्तियों का रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराना होगा। कुल स्वीकृत रिक्तियों और वर्तमान में खाली पदों की संख्या का ब्योरा भी मांगा गया है।

अधूरा जवाब देने पर अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष की चेतावनी
कमीशन ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया है कि मांगी गई जानकारी के संबंध में टालमटोल करने या अधूरा जवाब देने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला जा सकता है। आदेश में ऐसी स्थिति को मिलीभगत या जानबूझकर निर्देशों की अवहेलना के रूप में देखे जाने की चेतावनी भी दी गई है। अब जांच की अगली कड़ी में JSSC, शिक्षा विभाग और याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज अहम होंगे। मेधा सूची, प्राप्तांक, नियुक्ति अनुशंसाओं और रिक्तियों के रिकॉर्ड के मिलान से यह स्पष्ट करने की कोशिश की जाएगी कि वर्ष 2016 की हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ था या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2026 को होगी।

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