झारखंड में बेरोजगारी की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि स्नातक, परास्नातक और यहां तक कि पीएचडी तक की डिग्री रखने वाले युवा भी चौकीदार की नौकरी पाने के लिए लाइन में खड़े हैं।
मामला तमिलनाडु के शिवगंगा जिले का है। शिवगंगा जिले में रहने वाले कार्तिक ए के पास सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री है लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से वे जूते सिलने का काम करते हैं। कार्तिक ए ने बताया कि ये उनका पैतृक व्यवसाय है। उनके पिता ने यही काम करते हुए उनक
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के पांचवे दिन बगोदर विधानसभा क्षेत्र से माले विधायक विनोद सिंह ने बेरोजगारी के मसले पर सरकार को घेरा। माले विधायक ने कहा कि झारखंड सरकार ने स्नातक पास बेरोजगारों को भत्ता देने की घोषणा पिछले बजट सत्र में की थी लेकिन अभी तक इसका
नौकरी ले लो नौकरी। ढेर सारी नौकरी। अच्छी-अच्छी नौकरी। ताजा-ताजा नौकरी। हर साल 2 करोड़ नौकरी। हर साल पांच लाख नौकरी। नियुक्ति वर्ष वाली नौकरी। आत्मनिर्भर भारत वाली नौकरी। युवाओं....जल्दी करो। लेलो--लेलो नौकरी। नौकरी नहीं ले पाए तो बेरोजगारी भत्ता ले लो। कु
बेरोजगारी और दिवालियापन की वजह से आत्महत्या के मामलों का चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने राज्यसभा की कार्रवाई के दौरान बताया है कि 2018 से 2020 तक कितने नागरिकों ने बेरोजगारी, ऋणग्रस्तता और दिवालियापन की वजह से आत्महत्या की है। क
झारखंड में बेरोजगारी एक बड़ा मानवीय संकट बन गया है। राज्य के 24 जिलों के 43 नियोजनालय का आंकड़ा बताया है कि मौजूदा समय में राज्य के 5 लाख 60 हजार 722 युवा बेरोजगार हैं। ये ऐसे युवा हैं जिनका आवेदन लंबित है। इन युवाओं ने बेरोजगारी भत्ता के लिए आवेदन किया ह
दो दिन से गायब था
ना केवल झारखंड बल्कि पूरे देश में ही इस वक्त बेरोजगारी और रोजगार की मांग ज्वतलंत मुद्दा है। कोरोना की दूसरी लहर में भले ही पूरे देश में संपूर्ण लॉकडाउन ना लगाया गया हो लेकिन रोजगार पर इसका बुरा प्रभाव पड़ा है। जून में देश में बेरोजगारी दर 9.17 फीसदी थी। ह
झारखंड के बेरोजगारों को हर साल मिलेगा पांच हजार रुपया, सदन में सीएम हेमंत सोरेन ने की घोषणा