द फॉलोअप टीम, रांची:
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को सदन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बेरोजगारों को भत्ता देने की घोषणा की। सीएम हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री प्रोत्साहन राशि योजना के तहत प्रदेश के ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट बेरोजगारों को प्रति वर्ष बेरोजगारी भत्ता दिया जायेगा। बेरोजगारी भत्ता केवल प्रशिक्षित बेरोजगारों को दिया जायेगा।
पांच हजार बेरोजगारी भत्ता दिया जायेगा
सीएम ने सदन में घोषणा करते हुये बताया कि प्रशिक्षित बेरोजगारों को प्रत्येक साल बतौर बेरोजगारी भत्ता पांच हजार रुपये दिये जायेंगे। मुख्यमंत्री ने सदन में ये भी बताया कि निजी क्षेत्र में 75 फीसदी पदों पर स्थानीय युवाओं को नौकरी दी जायेगी। विधवा, दिव्यांग और आदिम जनजाति को पचास फीसदी यानी साढ़े सात हजार रूपया बेरोजगारी भत्ता दिया जायेगा। सड़क दुर्घटना में मृतक के आश्रितों को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जायेगी। सीएम ने इस बीच कई बातें भी कहीं।
लोकतांत्रिक मर्यादा के लिये काम किया
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन में कहा कि सरकारें आयेंगी जायेंगी लेकिन संस्थायें बनी रहेंगी। सीएम ने कहा कि 12 फरवरी को कैबिनेट की बैठक में कई फैसले लिये जायेंगे। सदन चल रहा है तो ऐसे में लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन किया जाना चाहिये। उन्होंने कहा सदन चल रहा है इसलिये लोकतांत्रित मर्यादाओं का पालन करते हुये हमने फैसलों को सार्वजनिक नहीं किया। इस बीच बेरोजगारी भत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
निश्चय पत्र और घोषणा में विरोधाभास है
दरअसल, 2019 के विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने निश्चय पत्र में लिखा था कि उनकी सरकार बनने पर राज्य में सभी बेरोजगारों को नौकरी मिलने तक बेरोजगारी भत्ता दिया जायेगा। 12 फरवरी को कैबिनेट में जो फैसला लिया गया, उसकी कॉपी जब बाहर आई तो लोग हैरान रह गये। इस फैसले में एक झोल था। फैसले में कहा कि गया कि आईटीआई, पॉलिटेक्निक और कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षित बेरोजगारों को ही बेरोजगारी भत्ता मिलेगा।