झारखंड में आगामी लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के प्रस्तावित परिसीमन की आहट के बीच आदिवासी समाज में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों में कटौती की आशंका को लेकर चिंता और आक्रोश बढ़ रहा है।