द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में आगामी लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के प्रस्तावित परिसीमन की आहट के बीच आदिवासी समाज में राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों में कटौती की आशंका को लेकर चिंता और आक्रोश बढ़ रहा है। परिसीमन के संभावित दुष्परिणामों और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों में कमी के खतरे को देखते हुए 30 अगस्त 2026 को रांची के मोरहाबादी मैदान में आदिवासी एकता महाजुटान रैली आयोजित की जाएगी। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने इस महाजुटान का आह्वान करते हुए पूरे राज्य के आदिवासी समाज से अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए रांची पहुंचने की अपील की है। बंधु तिर्की ने कहा कि परिसीमन केवल विधानसभा या लोकसभा क्षेत्रों की सीमाओं के पुनर्गठन का सामान्य तकनीकी विषय नहीं है। यह झारखंड के आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व, संवैधानिक अधिकारों और भावी पीढ़ियों के अस्तित्व से जुड़ा गंभीर सवाल है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 से 2008 के दौरान हुई परिसीमन प्रक्रिया में झारखंड में एसटी के लिए आरक्षित विधानसभा सीटों को 28 से घटाकर 22 करने का प्रस्ताव आया था। राज्य की विशेष परिस्थितियों और व्यापक जनविरोध के कारण उस समय इस फैसले पर रोक लगाई गई थी। अब एक बार फिर परिसीमन प्रस्तावित है, ऐसे में आदिवासी समाज को समय रहते सजग और संगठित होने की जरूरत है।

केवल जनसंख्या को आधार बनाना उचित नहीं
बंधु तिर्की ने कहा कि केवल जनसंख्या के आंकड़ों को आधार बनाकर परिसीमन करना आदिवासी बहुल राज्यों के साथ न्यायसंगत नहीं होगा। उन्होंने झारखंड के पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के साथ-साथ विकास परियोजनाओं के कारण हुए ऐतिहासिक विस्थापन और बड़े पैमाने पर पलायन को भी परिसीमन में ध्यान में रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि खदानों, बांधों और उद्योगों जैसी परियोजनाओं के लिए आदिवासियों ने अपनी पुश्तैनी जमीनें दी हैं। विस्थापन और पलायन के कारण राज्य की जनसांख्यिकी प्रभावित हुई है, इसलिए आदिवासी समाज के राजनीतिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। पूर्व मंत्री ने मांग की कि परिसीमन से पहले इस मुद्दे पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि परिसीमन के दौरान विधानसभा या लोकसभा सीटों की कुल संख्या बढ़ाई जाती है, तो अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि इससे आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बनाए रखने और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने में मदद मिलेगी।

आदिवासी विधायकों को लिखा पत्र
महाजुटान को राज्यव्यापी और प्रभावी बनाने के लिए बंधु तिर्की ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राजनीतिक लामबंदी शुरू की है। उन्होंने राज्य के तमाम आदिवासी विधायकों को पत्र लिखकर 30 अगस्त की रैली में शामिल होने और अपने-अपने क्षेत्रों से जनभागीदारी सुनिश्चित कराने की अपील की है। उन्होंने विधायकों से आग्रह किया है कि वे अपने विधानसभा क्षेत्रों से ग्रामीणों और आदिवासी समाज के लोगों को रांची पहुंचाने के लिए आवश्यक परिवहन और अन्य सुविधाओं की समुचित व्यवस्था करें, ताकि महाजुटान में राज्य के विभिन्न हिस्सों की प्रभावशाली भागीदारी दर्ज हो सके। बंधु तिर्की के इस आह्वान के बाद 30 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में प्रस्तावित आदिवासी एकता महाजुटान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। आयोजकों का जोर परिसीमन के संभावित प्रभावों को लेकर आदिवासी समाज के बीच जागरूकता बढ़ाने और राजनीतिक प्रतिनिधित्व तथा संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक आवाज उठाने पर है।
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