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मां BIT मेसरा में लगाती हैं झाड़ू-पोछा, बेटी ने हासिल की इंजीनियरिंग में PhD; रेखा कुमारी की कहानी प्रेरणादायक

मां BIT मेसरा में लगाती हैं झाड़ू-पोछा, बेटी ने हासिल की इंजीनियरिंग में PhD; रेखा कुमारी की कहानी प्रेरणादायक

द फॉलोअप डेस्क:

Jharkhand News: मां पिछले 26 वर्षों से जिस संस्थान में साफ-सफाई का काम कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, उसी संस्थान से बेटी ने इंजीनियरिंग में पीएचडी की डिग्री हासिल कर एक मिसाल कायम की है। यह कहानी रांची के तुरुप गांव की रहने वाली आरती कुमारी की है। BIT मेसरा के दीक्षांत समारोह में जब सैकड़ों विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की जा रही थीं, तब आरती की डॉक्टरेट की उपाधि ने संघर्ष, त्याग और सफलता की एक प्रेरणादायक कहानी बयां की। आरती अपने गांव की पहली महिला हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पीएचडी की डिग्री हासिल की है।

मां के संघर्ष ने बेटी को बनाया कामयाब

आरती कुमारी की सफलता के पीछे उनकी मां रानू देवी का वर्षों का संघर्ष और त्याग है। रानू देवी पिछले 26 वर्षों से BIT मेसरा में साफ-सफाई का काम कर रही हैं। आरती जब छोटी थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद मां ने अकेले ही तीनों बच्चों की परवरिश की और उनकी पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी उठाई। रानू देवी बताती हैं कि जब उन्होंने BIT मेसरा में काम करना शुरू किया था, तब उन्हें एक सप्ताह के लिए 400 रुपये मिलते थे। आज उन्हें 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। सीमित आमदनी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का सपना नहीं छोड़ा। उनकी मेहनत और समर्पण का ही परिणाम है कि आज उनकी बेटी ने इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की है।

खुद कभी स्कूल नहीं गईं, लेकिन बच्चों को पढ़ाने का देखा सपना

रानू देवी बताती हैं कि जब वह BIT मेसरा में काम करने आईं, तब उन्हें एहसास हुआ कि अगर वह खुद पढ़ी-लिखी होतीं, तो शायद उन्हें कोई बेहतर काम मिल सकता था। वह कभी स्कूल नहीं गईं, लेकिन उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाने और उन्हें बेहतर भविष्य देने का संकल्प लिया। परिवार चलाने के साथ-साथ तीनों बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना उनके लिए आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में भी बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी। आर्थिक तंगी के बीच उन्होंने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए हर संभव प्रयास किया। आज आरती की उपलब्धि उनकी मां के उसी संघर्ष, त्याग और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल है।

स्कॉलरशिप की मदद से पूरी की इंजीनियरिंग की पढ़ाई

आरती तीन भाई-बहनों में मझली हैं। उनके बड़े भाई लाइन होटल चलाते हैं, जबकि छोटे भाई पॉलिटेक्निक की पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। ऐसे में इंजीनियरिंग जैसी तकनीकी शिक्षा की फीस जुटाना एक बड़ी चुनौती थी। आरती बताती हैं कि पढ़ाई के दौरान फीस का इंतजाम करना काफी मुश्किल होता था। ऐसे समय में BIT मेसरा और सरकार की ओर से मिलने वाली छात्रवृत्ति ने उनकी मदद की। छात्रवृत्ति के सहारे वह अपनी पढ़ाई जारी रख सकीं और उच्च शिक्षा के अपने सपने को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ती रहीं। आरती ने BIT मेसरा से बीटेक और एमटेक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शोध जारी रखा और अब पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। आर्थिक चुनौतियों के बीच तकनीकी शिक्षा हासिल कर डॉक्टरेट तक पहुंचने का उनका सफर उनकी मेहनत और लगन को दर्शाता है।

वायरलेस नेटवर्क पर आधारित तकनीक पर किया शोध

आरती कुमारी की पीएचडी का विषय “Compressed Sensing-Driven Framework for Efficient and Reliable Image Communication over Wireless Network” है। इसका हिंदी अर्थ है- वायरलेस नेटवर्क के माध्यम से तस्वीरों के कुशल और विश्वसनीय संचार के लिए कंप्रेस्ड सेंसिंग आधारित फ्रेमवर्क। उनका शोध वायरलेस नेटवर्क के जरिए तस्वीरों को कम डेटा में कुशलतापूर्वक और विश्वसनीय तरीके से भेजने की तकनीक से जुड़ा है। आज के डिजिटल दौर में तस्वीरों का तेजी से आदान-प्रदान और उनकी गुणवत्ता बनाए रखना महत्वपूर्ण है। ऐसे में आरती का शोध इमेज कम्युनिकेशन की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। बीटेक और एमटेक के बाद पीएचडी तक पहुंचने का उनका सफर पढ़ाई के प्रति समर्पण, निरंतर मेहनत और तकनीकी शोध में उनकी रुचि को दर्शाता है। सीमित संसाधनों के बावजूद इस मुकाम तक पहुंचना उनकी उपलब्धि को खास बनाता है।

BIT मेसरा से हासिल की डॉक्टरेट की उपाधि

BIT मेसरा देश के प्रतिष्ठित तकनीकी शिक्षण संस्थानों में शामिल है। इसी संस्थान से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने और डॉक्टरेट की उपाधि हासिल करने वाली आरती के लिए यह उपलब्धि कई मायनों में खास है। वह अपने गांव की पहली महिला हैं, जिन्होंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। आरती की सफलता गांव की दूसरी लड़कियों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि सीमित आर्थिक संसाधन होने के बावजूद शिक्षा और निरंतर मेहनत के बल पर बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। हालांकि, इस सफर में परिवार का सहयोग, छात्रवृत्ति और शिक्षा के अवसर भी अहम भूमिका निभाते हैं।

बेटी की सफलता में दिखा मां के 26 साल के संघर्ष का सम्मान

आरती कुमारी की कहानी सिर्फ पीएचडी की डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं है। यह उस मां के संघर्ष की कहानी भी है, जिसने खुद कभी स्कूल में पढ़ाई नहीं की, लेकिन अपनी बेटी को इंजीनियरिंग में डॉक्टरेट तक पहुंचाने का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए लगातार मेहनत की। जिस BIT मेसरा में रानू देवी पिछले 26 वर्षों से साफ-सफाई का काम कर रही हैं, उसी संस्थान से उनकी बेटी का पीएचडी हासिल करना पूरे परिवार के लिए गर्व का क्षण है। आरती की डॉक्टरेट की उपाधि उनकी मेहनत और प्रतिभा के साथ-साथ उनकी मां के त्याग, संघर्ष और समर्पण का भी प्रतीक है। आरती कुमारी की उपलब्धि बताती है कि आर्थिक परेशानियां सफलता की राह को कठिन जरूर बना सकती हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और शिक्षा के अवसरों से आगे बढ़ने का रास्ता बनाया जा सकता है। आज आरती अपने गांव की लड़कियों के सामने एक ऐसी मिसाल हैं, जो उन्हें अपने सपनों को पूरा करने और शिक्षा के जरिए बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।

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