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देशभर में आज रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का त्योहार मनाया जा रहा है। हालांकि, इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति है कि राखी कब बांधें आज या कल। भाई-बहन ही एक दूसरे के सबसे पहले और सबसे करीबी दोस्त होते हैं। इसी प्यार भरे रिश्ते को और खास बनाने के लिए हर साल रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इसे हर तबके के लोग बड़े ही प्यार से मनाते हैं। भारतीय किक्रेटरों (Indian Cricketers) ने यह त्योहार धूमधाम से मनाया है। आज हम आपको ऐसे ही 5 किक्रेटरों के बारे में बताएंगे जिनकी कामयाबी के पीछे उनकी बहनों का हाथ रहा और अगर बहनें ना होतीं तो शायद वो क्रिकेटर भी नहीं बन पाते।

महेंद्र सिंह धोनी
भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ी और रांची के राजकुमार महेंद्र सिंह धोनी की सफलता के पीछे उनकी बहन जयंती का बड़ा हाथ रहा है। जहां एक तरफ धोनी के पिता उन्हें क्रिकेटर नहीं बनाना चाहते थे वहीं, धोनी की बहन जयंती हर मोड़ पर अपने भाई के साथ खड़ी रहीं। स्कूल टाइम में जब पिता टीम इंडिया के पूर्व कप्तान को पढ़ने पर ध्यान लगाने के लिए कहते थे, उस वक्त जयंती उनको खेलने देने के लिए पिता को मनाया करती थीं। बहन का निरंतर समर्थन पाकर ही धोनी मैदान पर बेधड़क छक्के उड़ाते रहे और टीम इंडिया के कैप्टन कूल बन सके। माही की बहन जयंती एक स्कूल टीचर हैं।

सचिन तेंदुलकर
किक्रेट के भगवान और मास्टर ब्लास्टर कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर के जीवन में भी उनकी बहन की अहम भूमिका रही है। सचिन की बहन का नाम सविता है और वो उनके पिता रमेश तेंदुलकर की पहली पत्नी की बेटी हैं। सचिन ने कितनी बार अपने सफलता का श्रेय अपनी बहन को दिया है। सचिन के हर मैच में उनकी बहन सविता उपवास रखती थी ताकि भाई का बल्ले से रनों से बरसात हो। सचिन ने जब 200 टेस्ट मैच खेलने के बाद क्रिकेट को अलविदा कहा तो उस समय उन्होंने अपनी स्पीच में कहा था कि उन्हें पहला कश्मीरी विलो क्रिकेट बैट उनकी बहन ने ही गिफ्ट किया था।

हरभजन सिंह
भारतीय टीम के महान ग्रेट स्पिनर्स हरभजन सिंह की 5 बहने हैं। साल 1998 में अपने किक्रेट करियर की शुरुआत की थी लेकिन, 2000 में उनके पिता के निधन हो गया जिसके बाद उनपर ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई। जिसके बाद उन्होंने कनाडा में ट्रक चलाने का फैसला किया। इसके बाद उनकी बहनों ने उन्हें रोका और अपनी किक्रेट खेलते रहे। जिसके बाद साल 2000 की रणजी ट्रॉफी में उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर टीम इंडिया में जगह बनाई थी। फिर जो हुआ, वह इतिहास है।

विराट कोहली
विराट कोहली और उनकी बहन भावना कोहली का रिश्ता बेहद खास है। उनकी बहन भावना ने उनके पिता के निधन बाद उनका हर कदम पर साथ दिया। इतनी छोटी उम्र में पिता को खोने के बाद वे बिल्कूल टूट चुके थे। इसके बाद उनकी बहन ने हर तरह से उनका सपोर्ट किया। इसका जिक्र कई बार कोहली पहले कर चुके हैं। पिता के जाने के बाद बहन और मां के साथ के कारण ही विराट क्रिकेटर बनने का सपना पूरा कर सके।

ऋषभ पंत
ऋषभ पंत के पिता के निधन के बाद बहन साक्षी भाई के साथ साये की तरह बनी रहीं। जिस वक्त वह टीम इंडिया में जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस समय साक्षी भाई के साथ हर घरेलू मैच के दौरान स्टेडियम जाती थीं। दर्शक दीर्घा में खड़े होकर भाई के लिए निरंतर तालियां बजाती थीं। वह सिलसिला आज पंत के इंडियन टीम के स्टार विकेटकीपर बैटर बनने के बाद भी बदस्तूर जारी है।
