अभिषेक पीयूष/जमशेदपुर
झारखंड के सारंडा के घने जंगलों में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। नक्सलियों की गोली और आईईडी के खतरे के साथ-साथ प्रकृति के अदृश्य जोखिम भी जवानों के लिए मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। मलेरिया फैलाने वाले मच्छर और मधुमक्खियों के हमले अभियान को और जटिल बना रहे हैं।

मधुमक्खियों के हमले में चार जवान घायल
बुधवार सुबह मधुमक्खियों के हमले में CRPF के चार जवान घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल इलाज के लिए मनोहरपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार सभी की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। सारंडा क्षेत्र में तैनात जवान ऐसे वातावरण में काम कर रहे हैं, जहां हर कदम पर खतरा मौजूद है। एक ओर नक्सलियों द्वारा बिछाए गए आईईडी कभी भी जानलेवा साबित हो सकते हैं, वहीं दूसरी ओर मलेरिया का प्रकोप भी गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

मलेरिया से जवान की मौत, बढ़ी चिंता
हाल ही में इस अभियान में शामिल एक जवान की मलेरिया की चपेट में आने से मौत हो चुकी है, जिससे सुरक्षा बलों की चिंता और बढ़ गई है। अब मधुमक्खियों के हमले ने इन चुनौतियों को और गंभीर बना दिया है। इन विषम परिस्थितियों के बावजूद सुरक्षा बल के जवान पूरी प्रतिबद्धता और साहस के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। सारंडा के घने जंगलों में यह अभियान सिर्फ दिखाई देने वाले दुश्मनों से ही नहीं, बल्कि अदृश्य खतरों से भी जूझने का उदाहरण बन गया है।