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JPSC-1&2 : बयानबाज़ी में जंग, सोच में साठगांठ: सत्ता और प्रतिपक्ष की एक जैसी प्रशासनिक उदासीनता ! 

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द फॉलोअप, रांची
सीबीआई ने जेपीएससी प्रथम और द्वितीय परीक्षा घोटाले में अक्टूबर 2024 में तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप प्रसाद सहित 60 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। हेमंत सरकार ने इसके बाद जुलाई 2025 में राज्य सरकार के विधि विभाग से फाइल लौटने के बाद कार्मिक विभाग ने पूर्व अध्यक्ष और परीक्षा नियंत्रक के खिलाफ अभियोजन की आधिकारिक स्वीकृति प्रदान कर दी। लेकिन आज तक काम कर रहे कई अधिकारियों पर सरकार मौन है। सरकार कोर्ट से जल्द सुनवाई करने का ना आग्रह कर रही है और ना ही सीबाई को इस केस को लेकर कोई हड़बडी है। हर कोई अपनी गति से चल रहा है। सीबीआई चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को समन जारी किया था। इसके तहत जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष दिलीप प्रसाद, पूर्व सदस्य गोपाल प्रसाद सिंह, शांति देवी और राधा गोविंद सिंह नागेश सहित कई आरोपी सीबीआई कोर्ट के समक्ष पेश हो चुके हैं।  मामले के कई मुख्य आरोपियों को पूर्व में ही सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाई कोर्ट से नियमित अथवा अग्रिम जमानत मिल चुकी है, जिसके कारण वर्तमान अदालती कार्यवाही के दौरान उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया है।  दिलीप प्रसाद और अन्य आरोपियों को जुलाई 2025 में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा वित्तीय अनियमितता और गबन से जुड़े एक अन्य पुराने मामले में 2 वर्ष की कैद और ₹1 लाख जुर्माने की सजा भी सुनाई जा चुकी है, जिसमें उन्हें बाद में जमानत मिल गई थी। अब सवाल उठाता है कि आगे क्या उस समय के कई अधिकारियों का प्रमोशन भी इसी कारण नहीं हुआ कि उनकी नियुक्ति पर जांच चल रही है। जांच का यही हाल 2007-08 के लेक्चरर घोटाले की भी है। यहां भी वर्षों बाद कोई अंतिम फलाफल नहीं आया है। 


सत्ता औऱ विपक्ष दोनो की सोच एक 
किसी भी पार्टी की सरकार हो या विपक्ष कई मुद्दों पर इनकी सोच एक जैसी ही रहती है। इस केस में अंतिम फैसला जल्द आ जाये ताकि लोगों को विश्वास हो कि न्याय पाने मे देरी तो हुई लेकिन अंधेर नहीं हुआ। यानि सच की जीत हुई और भ्रष्ट्राचार हार गया। इसको लेकर ना तो विपक्ष सरकार से कोई सवाल करता है ना ही सरकार कोर्ट से जल्द फैसले की गुहार लगाता है। माने हर कोई बस यही सोच रहा है कि ठीक है जीतना समय लगे, तब तक भ्रष्ट्र अधिकारी भी रिटायर कर जायेंगे और नई नेताओं का चेहरा भी बे नकाब नहीं होगा। भ्रष्ट्राचार के मुद्दे पर जनता से सिर्फ वोट लो फिर काम वही करो जिससे लाभ हो।


सीबीआई जांच की मांग
राज्य में जेपीएससी और जेएसएससी के द्वारा ली गई परिक्षा को लेकर एक बार फिर सीबीआई जांच की मांग हो रही है। कई छात्र नेता समेत पूरा विपक्ष पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहा है। जैसे सीबीआई की जांच शुरू होते हीं दुध का दुध और पानी का पानी हो जायेगा। लेकिन अगर झारखंड में जांच के इतिहास को देखे तो ऐसा लगता नही हैं।


सत्ता बदली, सियासत नहीं: नीति से लेकर नीयत तक... दोनों का एक ही 'डीएनए'! 
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो देश भर में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं और पेपर लीक से जुड़े लगभग 158 मामलों की जांच पूरी कर चुकी है और इन सभी में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, ये सभी 158 मामले देश की विभिन्न अदालतों में सुनवाई शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। हाल ही में बने नए सख्त एंटी-पेपर लीक कानून (सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024) के तहत, सीबीआई ने सभी राज्यों के हाई कोर्ट्स से इन 158 मामलों को विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है ताकि दैनिक आधार पर सुनवाई करके 3 महीने में फैसला आ सके। इन आकड़ो को देखे तो लगता है कि न्याय पाना इतना आसान भी नहीं है। जल्दी तो कुछ होता नहीं है, हर किसी की अपनी गति औऱ सिमाएं है, तो क्या हेमंत सरकार को या फिर बीजेपी कोई छात्रों को यह यकीन दिला पायेगा कि जांच को भी ऐजेंसी करे वे निश्पिक्ष और पास्ट होगा। या फिर सीबीआई जांच होते से विपक्ष को लगेगा कि उनकी जीत हुई और सत्ता की हार। सिर्फ इसी लिए तो इस मांग को लेकर विपक्ष इतना संवेदनशील तो नही है। अब जब सत्ता से सवाल होता है तो वे विपक्ष से सवाल करने लगता है, पुराने दिनो का हवाला देने लगता है। विपक्ष वर्तमान में जीता है और सवाल भी करता है कियोंकि उन्हे पता है हमारा दामन भी बहुत साफ नही हैं। इतिहास सबके दागदार है।

Tags - Jharkhand JPSC-1 & 2 CBI High Court Lecturer Scam