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मरांगबुरु बचाओ समिति के 2 दिवसीय धोरोमगाड़ महासम्मेलन का आगाज, कल जुटेंगे 1 लाख लोग; सीएम भी करेंगे शिरकत! 

मरांगबुरु बचाओ समिति के 2 दिवसीय धोरोमगाड़ महासम्मेलन का आगाज, कल जुटेंगे 1 लाख लोग; सीएम भी करेंगे शिरकत! 

गिरिडीह:

मरांगबुरु बचाओ समिति द्वारा आयोजित 2 दिवसीय धोरोमगाड़ महासम्मेलन का 4 नवंबर को आगाज हुआ। पहले दिन मधुबन के पीरटांड़ स्थित मरांग बुरु मांझीथान में विधि-विधान से पूजा अर्चना की गई। मरांगबुरु बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष फागु बेसरा, महासचिव हीरालाल मांझी, डॉ. जगजीवन मुर्मू, सोमय टुडू, जंशाई मरांडी, दुर्गाचरण मुर्मू, रमेश टुडू, सोनाराम हेम्ब्रम, एतो बास्के, नारायण मुर्मू और महावीर बास्के ने विधिवत ढंग से मांझीथान में पूजा की और देवताओं को याद किया। 

फागु बेसरा ने क्या मांग रख दी है!
महासम्मेलन में पहुंचे फागु बेसरा ने कहा कि आदिवासियों का अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मरांग बुरु सदियों से हमारी आस्था का केंद्र है, लेकिन बीते कई वर्षों से सुनियोजित साजिश के तहत आदिवासियों को उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है। फागू बेसरा ने कहा कि साधन संपन्न लोगों ने मरांग बुरु का अतिक्रमण करके मंदिर और मठ बनाए हैं। आदिवासियों को उनकी परंपरा औऱ संस्कृति के केंद्र से दूर रखने का प्रयास किया जा रहा है। फागु बेसरा ने कहा कि धोरामगाड़ महासम्मेलन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उन्होंने दावा किया कि महासम्मेलन के दूसरे दिन 5 नवंबर को 1 लाख से ज्यादा लोग जुटेंगे। 

प्रकृति-आदिवासी का समन्वय पुराना
मरांग बुरु बचाओ समिति के केंद्रीय प्रवक्ता दुर्गाचरण मुर्मू ने कहा कि प्रकृति और आदिवासियों का साथ और समन्वय सदियों पुराना है। यह कुछ वर्षों की बात नहीं है। अब मरांग बुरु का अतिक्रमण किया जा रहा है। जैन धर्मावलंबियों ने मरांग बुरु में अतिक्रमण करके अनुमति से ज्यादा इलाके में निर्माण कार्य किया है। उन्होंने कहा कि यदि जैन धर्मावलंबी अपनी आस्था को लेकर चिंतित हैं तो हम आदिवासी भी अपनी आस्था को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि सभी की आस्था का सम्मान होना चाहिए। हम सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना नहीं चाहते, लेकिन आदिवासियों का अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पारसनाथ अथवा मरांगबुरु केवल जैन धर्मावलंबी ही नहीं बल्कि आदिवासियों का भी तीर्थस्थल है। 

 

आदवासी सांस्कृतिक झंडोत्तोलन भी हुआ
गौरतलब है कि दिशोम मांझीथान के पास पारंपरिक तरीके से आदिवासी सांस्कृतिक झंडोत्तोलन किया गया। महासम्मेलन के पहले दिन भारी संख्या में आदिवासी श्रद्धालु शामिल हुए। इस कार्यक्रम में झारखंड के सभी 24 जिलों के  अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, नेपाल और बांग्लादेश से भी प्रतिनिधि शामिल हुए। 

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