द फॉलोअप डेस्क:
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित धांधली को लेकर CID ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि परीक्षा में सफल कराने के लिए एक संगठित सिंडिकेट (syndicate) काम कर रहा था। आरोप है कि इस गिरोह ने OMR शीट में हेराफेरी कर कई अयोग्य अभ्यर्थियों के अंक बढ़ाए और उन्हें परीक्षा में सफल कराया। यहां तक कि परीक्षा के बाद OMR शीट के खाली गोले भरने और स्ट्रांग रूम से उत्तर पुस्तिकाएं निकालकर बाहर लिखवाने की बात भी जांच में सामने आई है।

10 आरोपितों के खिलाफ दाखिल हुआ पूरक आरोप पत्र
इस मामले की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने सोमवार को रांची स्थित CID की विशेष अदालत में 10 आरोपितों के खिलाफ पहला पूरक आरोप पत्र दाखिल किया। इसके साथ ही इस मामले में अब तक कुल 22 आरोपितों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। CID के अनुसार, इस पूरे खेल में अंतरराज्यीय परीक्षा माफिया, दलाल, बिचौलिये और अनुचित तरीके से सफल हुए अभ्यर्थियों का नेटवर्क सक्रिय था। जांच एजेंसी ने OMR शीट में हेराफेरी, अवैध वसूली और परीक्षा में फर्जीवाड़े से जुड़े डिजिटल और वित्तीय साक्ष्य भी अदालत में पेश किए हैं।

11 अभ्यर्थियों से वसूले गए 1.10 करोड़ रुपये
CID की चार्जशीट के मुताबिक, आरोपित बुद्धेश्वर भगत ने मास्टरमाइंड अभय तिवारी के करीबी के रूप में काम करते हुए 11 अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के नाम पर 1.10 करोड़ रुपये वसूले थे। वहीं, अन्य आरोपितों पर परीक्षा केंद्रों और मूल्यांकन प्रक्रिया में अनुचित लाभ दिलाने, गोपनीय दस्तावेजों का प्रबंधन करने और OMR शीट में हेराफेरी करने के आरोप हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि तत्कालीन JPSC सदस्य अजिता भट्टाचार्य के पीए ब्रज कुमार राम ने कथित तौर पर परीक्षा सेटिंग नेटवर्क और अधिकारियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। उस पर 11वीं से 13वीं जेपीएससी के साक्षात्कार में एक अभ्यर्थी के अंक बढ़वाकर डीएसपी पद पर चयन कराने के बदले पांच लाख रुपये लेने का भी आरोप है।

पूर्व अध्यक्ष समेत 34 आरोपित गिरफ्तार
इस मामले में CID अब तक JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते, उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता समेत 34 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। नए पूरक आरोप पत्र में बुद्धेश्वर भगत, रमेश कुमार, उमेश कुमार, ब्रज कुमार राम, अरुण कुमार, उमाकांत उरांव, मनोज कुमार, धर्मेंद्र कुमार, रक्षक सिंह और रोशन केरकेट्टा के नाम शामिल हैं। इनमें कुछ पर दलाल और एजेंट के रूप में काम करने, तो कुछ पर ओएमआर शीट में गड़बड़ी कर अनुचित तरीके से सफलता हासिल करने का आरोप है। CID के मुताबिक, इस पूरे सिंडिकेट ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और चयन प्रणाली को प्रभावित किया। मामले में जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र दाखिल किया गया है।