सुशील कुमार सिंह/गुमला:
रांची-रायपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर (Ranchi-Raipur Economic Corridor) का निर्माण तेजी से हो रहा है। इस कॉरिडोर के तहत गुमला (Gumla) में 32.3 किमी लंबी सड़क का निर्माण अब युद्धस्तर पर जारी है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के मातहत बन रहे इस कॉरिडोर के निर्माण की रफ्तार धीमी थी, लेकिन बारिश का सिलसिला थमते ही काम दोबारा शुरू हो गया है। गौरतलब है कि इस कॉरिडोर के लिए जरूरी जमीन का अधिकांश हिस्सा अधिगृहित कर लिया गया है। 2-4 गांव ही बचे हैं, जहां जमीन का अधिग्रहण किया जाना बाकी है। स्थानीय ग्रामीणों को उम्मीद है कि सड़क बन जाने से उनके इलाके में विकास पहुंचेगा।

रांची-रायपुर कॉरिडोर से जगी विकास की उम्मीद
उम्मीद है कि रांची-रायपुर कॉरिडोर का हिस्सा होने की वजह से गुमला के इस इलाके में विकास होगा। स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान रखा जा रहा है। सड़क निर्माण करा रही शिवालया कंपनी के जीएम ने कहा कि इस सड़क पर बड़ी संख्या में पुल भी बनाए जाने हैं। वनक्षेत्र में पेड़ों को काटने और ट्रांसप्लांट करने का आदेश मिला है। स्थानीय युवक अमित महतो का मानना है कि रांची से भरदा तक सड़क निर्माण हुआ था, लेकिन आगे अच्छी सड़क नहीं थी। अब कॉरिडोर बनने से छत्तीसगढ़ की सीमा पर शंख मोड़ तक सड़क होगी। इकोनॉमिक कॉरिडोर गुमला से होकर गुजरेगा तो जिले को भी आर्थिक लाभ होगा।
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झारखंड-छत्तीसगढ़ में आर्थिक गतिविधि का लाभ
रांची-रायपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर से गुमला वासियों में नई उम्मीद जगी है। उनका ऐसा मानना है कि इकोनॉमिक कॉरिडोर होने से दो प्रदेशों के बीच आर्थिक गतिविधियां बढ़ेगी और इस रास्ते पर आने का आर्थिक लाभ गुमला को भी मिलेगा। दरअसल, गुमला दशकों तक पक्की सड़क नहीं होने की वजह से विकास नहीं होने का दंश झेलता रहा। यहां दशकों तक नक्सलवाद की समस्या भी रही, लेकिन अब उम्मीद जगी है।
यह 6 लेन इकोनॉमिक कॉरिडोर विकास लेकर आएगा, गुमला वासियों को उम्मीद है। सड़क के लिए जमीन देने वाले रैयतों का भी मानना है कि मुआवजा अपनी जगह है, लेकिन इससे उनके बच्चों के लिए भविष्य का रास्ता खुलेगा। उन्हें रोजगार मिलेगा।