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JSSC-CGL के चयनित अभ्यर्थियों ने CM हेमंत को लिखी चिट्ठी, कहा- हमारे भविष्य का सोचें

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द फॉलोअप डेस्क, रांची:

JSSC-CGL के चयनित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है।  उन्होंने कहा है कि मौजूदा परिस्थिति में सभी चयनित अभ्यर्थी अपने भविष्य के प्रति आशंकित हैं। उनका कहना है कि वे भय और तनावपूर्ण माहौल में  काम कर रहे हैं। अभ्यर्थियों ने कहा कि वे हाईकोर्ट के आदेश और सरकार द्वारा गठित चयन प्रक्रिया के माध्यम से चयनित हुए हैं। कई अभ्यर्थी गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं और कई तो पहले की नौकरी छोड़कर आए हैं। अभ्यर्थियों ने कहा कि यह नौकरी उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन है और इसके अभाव में सभी के जीवन में प्रश्न चिन्ह लग जायेगा। अभ्यर्थियों ने JSSC-CGL से संबंधित कोई भी फैसला लेने से पहले उनके बारे में सोचने की अपील की है।

JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की मांग की जा रही
गौरतलब है कि रांची में जारी छात्र आंदोलन में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग की जा रही है। आंदोलनरत छात्रों का आरोप है कि इस भर्ती प्रक्रिया में व्यापक पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। दरअसल, सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच गतिरोध ही JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग पर जारी है। आंदोलनरत  छात्रों की मांग है कि JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करके उसकी गहन उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो। दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि सीआईडी जांच में पेपर लीक की बात साबित नहीं होने और हाईकोर्ट के आदेश पर ही परिणाम जारी किया गया है।

मामला कोर्ट में लंबित है और इसलिए उसके बारे में कोई भी निर्णय करना उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। सोमवार को इस मुद्दे पर सरकार और छात्रों के बीच बातचीत होने वाली थी। 

CID की जांच में पेपर लीक की बात से इनकार किया
दरअसल, 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी मामले में  गिरफ्तार अभय कुमार तिवारी भी JSSC-CGL के माध्यम से प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर चयनित हुआ था और गिरफ्तारी के समय पोड़ैयाहाट प्रखंड में कार्यरत था। उसने CID के सामने यह कबूल किया है कि JSSC-CGL के माध्यम से उसके कई करीबी रिश्तेदारों का चयन भी विभिन्न पदों पर हुआ है। गौरतलब है कि परीक्षा में पेपर लीक के आरोपो की जांच CID ने की थी और जांच में पाया कि अभ्यर्थियों से नौकरी दिलाने के नाम पर एक गिरोह ने ठगी की थी, लेकिन पेपर लीक होने का साक्ष्य नहीं मिला।

कोर्ट ने जांच रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए आयोग को परिणाम जारी करने का आदेश दिया था। कोर्ट के आदेश पर सरकार ने 1932 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया। 


 

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