गिरिडीह:
झारखंड की पंचायतों को 15वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि को लेकर पेंच फंस गया है। केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय की ओर से 16 सितंबर 2026 को जारी पत्र में बताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 की 15वें वित्त आयोग की दूसरी किस्त जारी करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने झारखंड मुखिया संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सुबोध कुमार यादव को भेजे पत्र में बताया है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 15वें वित्त आयोग के अनटाइड अनुदान की पहली किस्त तथा वित्तीय वर्ष 2024-25 की पहली और द्वितीय किस्त के रोके गए हिस्से समेत संबंधित अनुदान राशि वित्त मंत्रालय की ओर से 24 मार्च 2026 को जारी की गई थी।

राज्य सरकार ने अपेक्षित सर्टिफिकेट नहीं दिया
मंत्रालय के मुताबिक, उक्त राशि को ग्रामीण स्थानीय निकायों तक हस्तांतरित किए जाने के संबंध में राज्य सरकार की ओर से अपेक्षित Grant Transfer Certificate (GTC) मंत्रालय को उपलब्ध नहीं कराया गया। इसी वजह से वित्तीय वर्ष 2025-26 की अनटाइड अनुदान की दूसरी किस्त जारी करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय की ओर से वित्त मंत्रालय को सिफारिश नहीं की गई।
मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है 15वें वित्त आयोग की अवधि
पत्र में यह भी कहा गया है कि 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है। मंत्रालय के अनुसार, इसके अतिरिक्त वित्त मंत्रालय और व्यय विभाग की ओर से 15वें वित्त आयोग के तहत ग्रामीण स्थानीय निकायों को अनुदान जारी करने संबंधी दिशा-निर्देश वित्तीय वर्ष 2025-26 तक ही प्रभावी थे। ऐसे में अनुशंसा अवधि समाप्त होने के बाद झारखंड की पंचायतों के लिए 15वें वित्त आयोग के तहत अतिरिक्त अनुदान जारी करने की सिफारिश करना संभव नहीं है।
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मुखिया संघ ने केंद्र से की हस्तक्षेप की मांग
इधर, झारखंड मुखिया संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष सुबोध कुमार यादव ने केंद्रीय पंचायती राज मंत्री को पत्र भेजकर पंचायतों की लंबित राशि जारी कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पंचायतों को समय पर राशि नहीं मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर झारखंड की पंचायतों को 15वें वित्त आयोग की लंबित राशि उपलब्ध कराने की मांग की है।