जीतेंद्र कुमारः
Jharkhand Development News: राज्य में लघु खनिजों (मिट्टी, मोरम और बालू भी) के रॉयल्टी का चालान नहीं मिल रहा है। इस कारण ठेकेदारों का भुगतान नहीं हो रहा है। विकास के काम धीरे-धीरे प्रभावित होने लगे हैं। मिट्टी और मोरम से जुड़ी कई योजनाओं के अब ठप होने की स्थिति बन रही है। कार्य विभाग सरकार से इस परेशानी को दूर करने के लिए लगातार मांग कर रहे हैं। ठेकेदार बुरी तरह हलकान हैं। लेकिन सरकार पूरी तरह इत्मीनान है। पिछले कुछ महीनों से लघु खनिजों के चालान को लेकर आयी असहज स्थिति अब विकराल रूप लेता जा रहा है। बावजूद सरकार पर इसका कोई असर नहीं है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार खान एवं भूतत्व विभाग ने सरकार से कुछ महीनों के लिए पूर्व की स्थिति बहाल करने का प्रस्ताव भी दिया है। लेकिन मामला वित्त और सरकार के शीर्ष स्तर पर उलझा हुआ है। हालांकि जानकारों का कहना है कि सरकार ही नहीं चाह रही है कि ठेकेदारों का भुगतान हो। क्योंकि उसके पास विकास कार्यों के विरुद्ध संवेदकों को किए जाने वाले हजारों करोड़ रुपए के भुगतान के लिए आवश्यक राशि नहीं है। इसलिए इसे लंबित किया जा रहा है।
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क्या है स्थिति और इसका कारण क्या है
सरकार ने 23 अप्रैल 2026 को झारखंड लघु खनिज समुदान नियमावली की धारा 55 को विलोपित कर दिया। इस धारा के तहत पहले सरकार के विकास कार्यों में इस्तेमाल होने वाले लघु खनिजों (मिट्टी, मोरम, बालू) की रॉयल्टी जमा करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनायी गयी थी। यदि कोई संवेदक अपने रनिंग एकाउंट बिल के साथ रॉयल्टी बिल जमा नहीं करता था तो दंड स्वरूप रॉयल्टी राशि जमा कर किए गए कार्य का भुगतान प्राप्त कर सकता था। लेकिन अप्रैल में जारी अधिसूचना के माध्यम से धारा-55 को पूरी तरह विलोपित कर दिया गया। मिट्टी, मोरम, बालू जैसे लघु खनिजों की रॉयल्टी जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। अब स्थिति यह है कि मिट्टी और मोरम के वैध खादान बहुत कम हैं। विकास के काम रांची में हैं तो वैध मिट्टी और मोरम का खदान खूंटी में। है भी तो पर्याप्त मिट्टी और मोरम की वहां उपलब्धता नहीं है। मिट्टी और मोरम के खनन के लिए वैध लाइसेंस भी निर्गत नहीं हो रहे हैं। परिणाम यह है कि विकास कार्य के लिए ठेकेदारों को वैध मिट्टी और मोरम के चालान नहीं मिल पा रहे हैं। वह उसे संबंधित कार्य विभाग में जमा नहीं कर पा रहे हैं। उनका भुगतान नहीं हो रहा है। और विकास के काम ठप पड़ते जा रहे हैं।

ग्रामीण कार्य विभाग की मांग बेअसर
विकास के काम प्रभावित होते देख ग्रामीण कार्य विभाग ने सरकार से इस परेशानी को दूर करने की मांग भी की। विभाग ने सरकार से दो बिंदुओं पर विशेष रूप से विचार करने का आग्रह किया। पहला, मिट्टी और मोरम से संबंधित लाइसेंस निर्गत नहीं होने की स्थिति में निर्माण कार्य के लिए संवेदक रॉयल्टी चालान किस प्रकार प्रस्तुत करेंगे। दूसरा, झारखंड में विभिन्न सरकारी और निजी परियोजनाओं के लिए लघु खनिजों की आवश्यकता और संबंधित लीज की क्षमता का आकलन करने का आग्रह किया गया। यह भी कहा गया कि यदि खनिजों की आवश्यकता उपलब्ध क्षमता से अधिक होती है तो विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए खान एवं भूतत्व विभाग से सरकारी योजनाओं में रॉयल्टी जमा करने के लिए झारखंड लघु खनिज समनुदान नियमावली, 2004 के नियम 55 को यथावत बनाए रखने की मांग की गयी। लेकिन ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा किए गए आग्रह का सरकार पर कोई असर नहीं हुआ है।
बिल्डर्स एसोसिएशन की मांग पर भी सरकार मौन
इधर Builders’ Association of India ने भी पत्र लिख कर सरकार से कहा है कि कई परिस्थितियों में रॉयल्टी चालान उपलब्ध नहीं होते हैं या उन्हें प्राप्त करना काफी कठिन होता जा रहा है। ऐसी स्थिति में संवेदकों के सामने गंभीर समस्या पैदा हो सकती है और निर्माण कार्यों के रुकने की नौबत आ सकती है। इसके अलावा सरकारी योजनाओं के रनिंग अकाउंट बिल भी प्रभावित होने तथा संवेदकों की कार्यशील पूंजी के अवरुद्ध होने की आशंका बढ़ गयी है।
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