द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) से जुड़े मामलों की जांच को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जेपीएससी मामले की जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रही है। सरकारी अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है, लेकिन सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों और प्रभावशाली व्यक्तियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। रघुवर दास ने कहा कि सरकार ने एक बार फिर राज्य के छात्रों के साथ छल किया है। छात्रों से झूठे वादे कर उनका आंदोलन समाप्त करा दिया गया, लेकिन उन वादों को पूरा करने की दिशा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांग्ते और उनके पीए के खिलाफ सीआईडी जांच चल रही है तथा उनसे पूछताछ भी हो रही है। वहीं, जेपीएससी की तत्कालीन सदस्य रहीं अजीता भट्टाचार्य, जमाल अहमद और अनिमा हांसदा के पीए के खिलाफ इंटरव्यू मैनेज करने के लिए कथित तौर पर 15 लाख रुपये तक लेने की बात सामने आई है। इसके बावजूद संबंधित सदस्यों से पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है, यह गंभीर सवाल है।

11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा में सदस्यों की भूमिका पर सवाल
उन्होंने कहा कि 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा के दौरान ये सदस्य आयोग में रहे हैं और इस अवधि में आयोग के अध्यक्ष भी बदलते रहे। ऐसे में इन सदस्यों के बयान के बिना जांच को पूर्ण कैसे माना जा सकता है? उन्होंने कहा कि पूर्व अध्यक्ष नीलिमा केरकेट्टा और सदस्यों के बीच विवाद के कारण ही 11वीं से 13वीं जेपीएससी मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी नहीं हो सका था। रघुवर दास ने कहा कि राज्य सरकार ने 17 अगस्त 2026 को मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (समन्वय) के पत्रांक सीएस-01/मंत्रि0 बैठक (अन्यान्य) -07/2024/936 में स्पष्ट रूप से जेपीएससी-जेएसएससी में अनियमितताओं एवं कदाचारों को लेकर दर्ज कांडों की सुनवाई हेतु फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का वादा किया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग (समन्वय) के पत्र में भी जेपीएससी-जेएसएससी में अनियमितताओं एवं कदाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने के लिए उच्च न्यायालय से अनुरोध करने की बात कही गई थी। इसके बावजूद मामला आगे नहीं बढ़ा है।

परीक्षा सुधार समिति की बैठक नहीं होने पर सवाल
उन्होंने कहा कि सरकार ने जेपीएससी-जेएसएससी में परीक्षा सुधार के लिए व्यापक अध्ययन हेतु एक समिति गठित करने की भी घोषणा की थी। समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी थी, लेकिन आज तक समिति की एक भी बैठक नहीं हुई है। दो महीने की निर्धारित अवधि भी समाप्त होने वाली है। इससे स्पष्ट है कि सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर कितनी गंभीर है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जांच की आंच ऊंचे पदों पर बैठे लोगों तक न पहुंचे, इसके लिए अपने चहेतों को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। उन्होंने जेपीएससी की 11-13वीं परीक्षा में 40वीं रैंक प्राप्त करने वाले रवि कुमार का उदाहरण देते हुए कहा कि दस्तावेज के अनुसार उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश और हरियाणा में एफआईआर दर्ज है तथा उसे सॉल्वर गैंग का सरगना बताया गया है। उस पर इनाम घोषित होने और वर्तमान में अग्रिम जमानत पर होने की भी बात कही गई है। इसी प्रकार हरियाणा के विक्की के 37वीं रैंक प्राप्त करने तथा रवि कुमार, दिनेश प्रजापति और विक्की के बीच कथित संबंधों का भी उल्लेख किया गया है।
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रवि कुमार समेत अन्य पर CID जांच की मांग
रघुवर दास ने सवाल उठाया कि जब ऐसे गंभीर आरोप और मामले सामने हैं, तो इनके खिलाफ सीआईडी जांच क्यों नहीं हो रही है? उन्होंने आगे कहा कि 14वीं जेपीएससी में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के 418 विद्यार्थियों के सफल होने की खबरें भी मीडिया में आई थीं, लेकिन इस संबंध में भी अब तक कोई जांच नहीं की गई है। आखिर सरकार किसे बचाना चाहती है?रघुवर दास ने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़े मामलों में छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। इसलिए किसी भी स्तर पर दोषियों को बचाने का प्रयास नहीं होना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि जेपीएससी से जुड़े पूरे मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराई जाए, ताकि जांच की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे और वास्तविक दोषियों तक पहुंचकर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।