द फॉलोअप डेस्कः
कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने सोमवार को केंद्र सरकार पर राज्यपालों की भूमिका को दयनीय बना देने का आरोप लगाया और कहा कि या तो राज्यपाल का पद खत्म कर दिया जाए या फिर सबकी सहमति से ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति हो जो तुच्छ राजनीति में शामिल नहीं हो। अभिषेक सिंघवी ने कहा कि दलगत भावना से ऊपर उठकर काम करना सुनिश्चित करने के लिए देश में संसदीय सुधार करने की जरूरत है। तेलंगाना से राज्यसभा सांसद अभिषेक सिंघवी ने संसद में आसन और विपक्ष के बीच टकराव पर भी बात की।

उन्होंने कहा कि मैं संसदीय भावना को महत्व देता हूं। मैं वास्तव में इसमें विश्वास करता हूं। मेरा मानना है कि सेंट्रल हॉल मात्र एक जगह नहीं है, यह एक "अवधारणा" (कॉन्सेप्ट) है। मैं दलगत भावना से अलग उदारता में विश्वास करता हूं। साक्षात्कार के दौरान उन्होंने राजग सरकार के दौरान शीतकालीन सत्र में बड़ी संख्या में सांसदों के निलंबन पर भी अपना रोष प्रकट किया।

उन्होंने कहा कि मात्र अपनी वैचारिक असहमति के कारण आप 142 लोगों को निलंबित नहीं कर सकते और न ही आप अपना तर्क देकर लोकतंत्र को नकार सकते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को संसद में अपनी बात रखनी होगी और सरकार को भी विपक्ष को सुनना होगा। सिर्फ दिखावे के लिए संसद (आर्टिफिशियल पार्लियामेंट) नहीं हो सकती।