द फॉलोअप डेस्क, रांची:
7वीं JPSC सिविल सेवा की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में सफलता हासिल करने के बावजूद जाति प्रमाण पत्र में त्रुटि का हवाला देकर चंचला कुमारी नाम की अभ्यर्थी का रिजल्ट रोके जाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी की गलती का खामियाजा अभ्यर्थी को भुगतना पड़े, यह ठीक नहीं है। कोर्ट ने JPSC को निर्देश दिया है कि वर्ष 2021 में आयोजित 7वीं-10वीं सिविल सेवा परीक्षा में चंचला कुमारी की उम्मीदवारी पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए और राज्य सरकार को उनकी नियुक्ति की अनुशंसा भेजना चाहिए।
गौरतलब है कि इस मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक रोशन की सिंगल बेंच में हुई। चंचला कुमारी मामले में हाईकोर्ट ने आयोग को 8 सप्ताह में प्रक्रियाा पूरी करने का आदेश दिया है।

आयोग से अनुशंसा मिलने पर 4 सप्ताह में नियुक्ति
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि आयोग से अनुशंसा मिलने के बाद राज्य सरकार को 4 सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करना होगा। गौरतलब है कि चंचला कुमारी ने अनुसूचित जाति वर्ग में 7वीं-10वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में आवेदन किया था। चंचला ने पीटी और मुख्य परीक्षा पास की। मुख्य परीक्षा में उन्होंने कुल 590 अंक हासिल किए जो SC वर्ग के तय कटऑफ (583) से ज्यादा था। हालांकि, 31 मई 2022 को जारी अंतिम परिणाम में चंचला कुमारी का चयन रोक दिया गया। आयोग ने हवाला दिया कि पीटी परीक्षा के समय जमा किए गए जाति प्रमाण पत्र में चंचला कुमारी के पिता की जगह पति का नाम दर्ज था।

जाति प्रमाण पत्र में पिता की जगह पति का नाम
याचिकाकर्ता चंचला कुमारी ने 4 जनवरी 2019 को जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था, लेकिन कोडरमा एसडीओ कार्यालय ने जो जाति प्रमाण पत्र जारी किया, उसमें पिता की जगह पति का नाम लिख दिया। सुनवाई के बाद अदालत ने माना कि जाति और निवास की स्थिति पर कोई विवाद नहीं है। प्रमाण पत्र में पति का नाम दर्ज होना प्रशासनिक अधिकारी की चूक का नतीजा है। अदालत ने कहा कि इस तकनीकी आधार पर अधिक अंक पाने वाली योग्य उम्मीदवार को नौकरी से वंचित करना अनुचित होगा।