दीपक कुमार/जामताड़ा:
जामताड़ा में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन के नाम पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने क्षेत्र के गरीब किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। आरोप है कि वर्ष 2023-24 में केसीसी लोन के लिए आवेदन करने वाले 42 किसानों के नाम पर कथित तौर पर करीब 60-60 हजार रुपये की फर्जी निकासी कर ली गई। अब, जुलाई 2026 में बैंक द्वारा ब्याज समेत राशि वसूलने और ऐसा न करने पर 7 दिनों के भीतर संपत्ति की कुर्की-जब्ती का नोटिस जारी किए जाने के बाद पीड़ित किसान गहरे संकट में हैं।
पूरा मामला जामताड़ा के उदलबनी पंचायत अंतर्गत आसनचुआ और बरजोरा पंचायत अंचर्गत बरजोरा गांव का है।

बड़ा सवाल है कि यह फर्जीवाड़ा कैसे हुआ!
पीड़ित किसान अर्जुन महतो, मनोज कुमार महतो, सुरेश प्रसाद महतो सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2023-24 में आसनचुआ स्थित बैंक ऑफ इंडिया (BOI) द्वारा संचालित एक ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) में केसीसी लोन के लिए अपने दस्तावेज और फॉर्म जमा किए थे। फॉर्म जमा होने के महीनों बाद तक उन्हें लोन स्वीकृत होने की कोई जानकारी नहीं दी गई।
चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब वर्ष 2024 के आखिरी महीनों में अचानक किसानों के मोबाइल पर ₹60,000 की निकासी के मैसेज आने लगे। किसानों का स्पष्ट कहना है कि उन्होंने बैंक से ऐसी किसी राशि की निकासी नहीं की। उन्हें यह भी नहीं पता था कि उनके नाम पर लोन खाता कब खुला और कब पैसे आए।
फर्जीवाड़े के बाद वह सीएसपी (CSP) केंद्र बंद हो गया और उसका संचालक भी मौके से फरार हो गया।

बैंक ने दिया था कार्रवाई नहीं करने का भरोसा
धोखाधड़ी का पता चलते ही पीड़ित किसान तुरंत बैंक ऑफ इंडिया की मिहिजाम शाखा पहुंचे। वहां के बैंक कर्मियों और मैनेजर ने माना कि किसानों के साथ धोखाधड़ी हुई है, और तब उन्हें आश्वासन दिया गया था कि मामला सुलझा लिया जाएगा और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी।
जामताड़ा एसपी से शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं
इसके बाद न्याय की गुहार लगाने जब किसान थानों के चक्कर काटने पहुंचे, तो उन्हें निराशा ही हाथ लगी। मिहिजाम थाना के अधिकारियों ने यह कहकर टाल दिया कि सीएसपी जामताड़ा थाना क्षेत्र में आता है, इसलिए मामला वहां दर्ज कराएं। जामताड़ा थाना पहुंचने पर अधिकारियों ने दलील दी कि मुख्य बैंक (बैंक ऑफ इंडिया) मिहिजाम क्षेत्र में है, इसलिए केस वहां दर्ज होगा। थक-हारकर किसानों ने साल 2024 में ही जामताड़ा एसपी (SP) को लिखित आवेदन देकर मामले की शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं हुई।

किसानों ने क्रेडिट कार्ड से की थी रुपये की निकासी
किसानों ने बताया कि फॉर्म जमा करने के कुछ समय बाद उन्हें सिर्फ एक क्रेडिट कार्ड दिया गया था, जिसमें 5,000 रुपये की लिमिट थी। कुछ किसानों ने केवल उसी 5,000 की निकासी की थी, लेकिन अब बैंक ने बिना किसानों के हस्ताक्षर के निकाली गई 60,000 रुपये की मुख्य लोन राशि को ब्याज सहित चुकाने का फरमान सुना दिया है। जिन किसानों के साथ केसीसी लोन के नाम पर ठगी हुई है, वे सभी काफी गरीब हैं। खेती-बाड़ी करके भी मुश्किल से गुजारा होता है।
किसानों का कहना है कि वे खुद को बेचकर भी लोन और ब्याज की राशि नहीं चुका पाएंगे। इसके ऊपर कुर्की-जब्ती के नोटिस ने उन्हें डरा दिया है। किसानों की शिकायत है कि उनकी ना तो पुलिस सुन रही है और ना ही बैंक को परवाह है। उनका सवाल है कि जायें तो जाएं कहां...