द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
झारखंड में अगला त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव करीब छह महीने दूर है और मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल भी खत्म होने की ओर है। इस बीच गांवों के विकास से जुड़ी एक बड़ी राशि खर्च के इंतजार में पड़ी है। पांचवें राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर पंचायतों के लिए 658 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन इस राशि को किन कामों पर और किस प्रक्रिया के तहत खर्च किया जाना है, इसे लेकर विभाग की गाइडलाइन अब तक स्पष्ट नहीं हुई है। राज्य में पंचायती राज संस्थाओं की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने की जिम्मेदारी राज्य वित्त आयोग की है।

गांवों की जरूरतों के लिए रखी गई है बड़ी रकम
इस राशि का इस्तेमाल ग्रामीण इलाकों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े छोटे-बड़े कामों में किया जाना है। इनमें नल-जल योजनाओं और जलमीनारों की मरम्मत, बंद पड़ी योजनाओं को दोबारा शुरू करना, नालियों की मरम्मत, गांव की सड़कों से जुड़े काम, आंगनबाड़ी केंद्रों और सरकारी स्कूलों में जरूरी छोटे निर्माण कार्य शामिल हैं। राज्य की करीब 4,423 पंचायतों और बड़ी ग्रामीण आबादी को इस फंड से सीधे लाभ मिलने की उम्मीद थी। उपलब्ध राशि में ग्राम पंचायतों का हिस्सा सबसे ज्यादा है। कुल 658 करोड़ रुपये में करीब 493.51 करोड़ ग्राम पंचायतों, 98.70 करोड़ पंचायत समितियों और 65.79 करोड़ रुपये जिला परिषदों के लिए निर्धारित किए गए हैं।

जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल
त्रिस्तरीय पंचायत जनप्रतिनिधि संघ के अध्यक्ष विकास कुमार महतो ने कहा कि राशि आवंटित होने के बावजूद महीनों तक खर्च की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होना पंचायतों के कामकाज को प्रभावित कर रहा है। उनके मुताबिक, जनप्रतिनिधियों के सामने गांवों की समस्याओं को दूर करने की मांग लगातार आ रही है, लेकिन उपलब्ध राशि का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। पंचायतों के पास फंड पहुंचने के बावजूद अगर उसे खर्च करने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होगी, तो इसका सीधा असर ग्रामीण विकास कार्यों पर पड़ेगा। अब पंचायत चुनाव से पहले इस राशि के उपयोग को लेकर विभागीय स्तर पर दिशा-निर्देश जारी होने का इंतजार है।