द फॉलोअप डेस्क:
झारखंड में शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) का इंतजार कर रहे करीब 4.40 लाख अभ्यर्थियों के लिए परेशानी बढ़ती जा रही है। राज्य में पिछली जेटेट वर्ष 2016 में हुई थी। इसके बाद परीक्षा नहीं होने से शिक्षक प्रशिक्षण और बीएड पूरा कर चुके अभ्यर्थियों को शिक्षक बनने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। स्नातक, बीएड और अन्य शिक्षक प्रशिक्षण पूरा करते-करते अभ्यर्थियों की उम्र औसतन 25 से 26 वर्ष हो जाती है। ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया में देरी से उनकी उम्र सीमा पार होने का खतरा बढ़ रहा है।
.jpeg)
जेटेट में देरी से उम्र सीमा पार होने का खतरा
राज्य में हर साल करीब 15 हजार अभ्यर्थी शिक्षक प्रशिक्षण और बीएड पूरा करते हैं। वर्ष 2016 से 2019 के बीच करीब 60 हजार अभ्यर्थियों ने प्रशिक्षण हासिल किया। इनमें 35 से 40 हजार अभ्यर्थियों की नियुक्ति उम्र के कारण प्रभावित होने की आशंका है। आंकड़ों के मुताबिक, हर महीने औसतन 800 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की उम्र सीमा समाप्त हो रही है। झारखंड में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में शिक्षक नियुक्ति के लिए जेटेट पास करना जरूरी है। ऐसे में परीक्षा नहीं होने से प्रशिक्षित अभ्यर्थियों की पात्रता और रोजगार के अवसर दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

1 नवंबर को परीक्षा की उम्मीद
जेटेट आयोजित कराने को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने 31 मार्च 2026 तक परीक्षा कराने का निर्देश दिया था, लेकिन तय समय में परीक्षा नहीं हो सकी। जैक ने पहले 11 अक्टूबर को परीक्षा कराने की जानकारी दी थी, लेकिन यह तारीख भी टल गयी। अब जैक ने हाईकोर्ट को 1 नवंबर 2026 को परीक्षा कराने की बात कही है, हालांकि आधिकारिक तारीख घोषित नहीं हुई है। वर्ष 2012 से अब तक झारखंड में केवल दो जेटेट हुई हैं, जबकि इसी अवधि में सीबीएसई 21 सीटीईटी आयोजित कर चुका है और 22वीं परीक्षा की तारीख भी घोषित कर चुका है। अभ्यर्थियों की मांग है कि जेटेट जल्द आयोजित हो और आगे से नियमित अंतराल पर परीक्षा करायी जाए, ताकि उम्र सीमा के कारण उनका भविष्य प्रभावित न हो।