द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
भारत की संसद एवं राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों के अध्यक्षों एवं सभापतियों का सम्मेलन 3 एवं 4 नवंबर, 2026 को तिरुवनंतपुरम, केरलम में आयोजित किया गया। सम्मेलन में झारखण्ड विधान सभा की लोक लेखा समिति के सभापति मनोज कुमार यादव ने कहा कि वर्ष 1921 से लोक लेखा समिति सार्वजनिक व्यय में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आ रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि लोक लेखा समिति के 125 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर एक विशेष सम्मेलन आयोजित किया जाना चाहिए, जिससे समिति की ऐतिहासिक भूमिका एवं उपलब्धियों पर चर्चा के साथ भविष्य की कार्ययोजना भी तैयार की जा सके।

मनोज यादव ने विधानसभा की कार्यप्रणाली में आधुनिक तकनीक के उपयोग पर बल दिया। लोक लेखा समिति की कार्यवाहियों संबंधी प्रतिवेदनों की समयबद्ध समीक्षा,सार्वजनिक धन के वितरण एवं उपयोग की गहन जांच की बात कही। लोक लेखा समितियों के बीच अनुभवों एवं सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान तथा लेखा परीक्षा प्रस्तुत करने के लिए निश्चित समय-सीमा निर्धारित करने इत्यादि विषय पर विस्तार से बातें कही। राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों की प्रत्येक माह कम से कम तीन बैठकें आयोजित करने तथा लंबित ऑडिट टिप्पणियों की जांच एवं उन पर उचित निर्णय लेने , उप-समितियों के गठन पर विचार करने का सम्मेलन में संकल्प पारित किया गया। लोक लेखा समितियों की कार्यक्षमता बढ़ाने, वित्तीय पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण संकल्पों के साथ दो दिवसीय सम्मेलन का समापन हुआ। इस बैठक में झारखण्ड विधान सभा की लोक लेखा समिति के सभापति मनोज कुमार यादव, नमन बिक्सल कोंगाड़ी,जगत माझी एवं समीर कुमार मोहंती तथा विधान सभा के उप सचिव अनूप लाल इस सम्मेलन में शामिल हुए।
