जामताड़ा
जामताड़ा के दुमका रोड स्थित एक लॉज में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा की एक विशाल बैठक आयोजित की गई। बैठक में आंदोलनकारियों ने राज्य सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए चेतावनी दी है कि यदि 50 हजार रुपये मासिक पेंशन और नौकरियों में 10% क्षैतिज आरक्षण जैसी उनकी लंबित मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो आगामी 15 नवंबर को झारखंड स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी रांची में 50 हजार से अधिक आंदोलनकारी ऐतिहासिक महाआंदोलन करेंगे। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष नारायण मंडल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में मोर्चा के संस्थापक एवं प्रधान सचिव पुष्कर महतो उपस्थित रहे।
15 नवंबर को रांची में महाआंदोलन होने का कारण
बैठक में सरकार पर आंदोलनकारियों के साथ वादाखिलाफी करने और केवल झूठे आश्वासन देने का आरोप लगाया गया। मुख्य अतिथि पुष्कर महतो ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी लंबित मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो आगामी 15 नवंबर (झारखंड स्थापना दिवस) को रांची के अल्बर्ट एक्का चौक से बिरसा चौक तक 50 हजार से अधिक आंदोलनकारी विशाल प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा आंदोलन होगा, जिसकी पूरी नैतिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की होगी।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें
1. आंदोलनकारियों के लिए 50 हजार रुपये मासिक सम्मान पेंशन लागू की जाए।
2. आंदोलनकारियों के आश्रितों और पुत्र-पुत्रियों को सरकारी नौकरियों में 10% क्षैतिज आरक्षण दिया जाए।
3. सरकार द्वारा पूर्व में जारी गजट अधिसूचना और संकल्पों को तुरंत जमीन पर लागू किया जाए।
4. पद्म सम्मान से सम्मानित दिशोम गुरु शिबू सोरेन को राज्य सरकार गजट अधिसूचना जारी कर झारखंड आंदोलनकारी का सर्वोच्च सम्मान दे।
5. झारखंड के मूल निवासियों को यहां की खनिज संपदा पर 26% रॉयल्टी का मालिकाना हक सुनिश्चित हो।
आज भी गरीबी में जी रहे आंदोलनकारी
पुष्कर महतो ने कहा कि अलग राज्य के लिए आंदोलनकारियों ने लाठियां खाईं, जेल गए और खून-पसीना बहाया, लेकिन आज वे गरीबी में जीने को मजबूर हैं। उन्होंने 1955 में मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा के साथ हुए राजनीतिक छल का भी जिक्र किया। इसके अलावा, बैठक में संथाल परगना को अलग राज्य बनाने की मांग करने वाले सांसद के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग भी उठाई गई। इस बैठक में महेंद्र किस्कू, साकेश कुमार सिंह, भुजंग भूषण तिवारी, जगन्नाथ पंडित सहित गिरिडीह और करमाटांड़ के जिला अध्यक्ष व भारी संख्या में आंदोलनकारी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि अब आश्वासनों का दौर खत्म हो चुका है, और मांगें पूरी न होने पर 15 नवंबर को राजधानी रांची में निर्णायक शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा।