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माता-पिता बचपन में गुजरे, अब चाचा भी नहीं रहे; कंधा देने वाली 5 अनाथ बेटियां दाने-दाने को मोहताज

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​जामताड़ा:

जामताड़ा जिला अंतर्गत कर्माटांड़ प्रखंड से रूढ़िवादी सोच को तोड़ती एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे जिले को भावुक कर दिया है। यहां पांच सगी बहनों ने अपने दिवंगत चाचा को न केवल कंधा दिया, बल्कि सबसे छोटी भतीजी ने मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज भी निभाया। बेटियों की इस पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है, लेकिन इस सराहनीय कदम के पीछे छिपी गरीबी की दास्तां झकझोर देने वाली है।

माता-पिता के बाद चाचा ने पाला था, सब खत्म
​कर्माटांड़ निवासी ठाकुर प्रसाद साह का सोमवार को निधन हो गया। इन पांच बहनों, मौसम कुमारी, रूबी कुमारी, चंदा कुमारी, रिमझिम कुमारी और तन्नू कुमारी के सिर से बचपन में ही माता-पिता का साया उठ गया था। तब से उनके चाचा ठाकुर प्रसाद साह ने ही पिता बनकर उन्हें पाल-पोसकर बड़ा किया। वे छोटी सी दुकान चलाकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। चाचा के निधन के बाद सबसे छोटी भतीजी तन्नू कुमारी ने उन्हें मुखाग्नि दी।

अनाथ बच्चियों के सामने आजीविका का संकट
चाचा की मौत के बाद अब इन पांच अनाथ बहनों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। परिवार इस समय अत्यंत दयनीय स्थिति में गरीबी का दंश झेल रहा है। इस डिजिटल युग में भी परिवार को अब तक 'प्रधानमंत्री आवास योजना' का लाभ नहीं मिला है। पांचों बहनें एक ही जर्जर कमरे में रहने को मजबूर हैं। इसी एक कमरे में उनकी रसोई बनती है, यहीं वे सोती हैं और अपनी जीविका के लिए पाले गए मवेशियों (बकरियों) को भी इसी कमरे में साथ रखने पर विवश हैं।

​समाजसेवी ने प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
​इस दुखद स्थिति को देखते हुए स्थानीय समाजसेवी राजेंद्र मंडल ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से अविलंब हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन पांचों बहनों को तत्काल सरकारी सहायता, पक्का आवास और रोजगार के साधन उपलब्ध कराए जाएं ताकि वे सम्मानजनक तरीके से अपना जीवन यापन कर सकें।

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