दीपका झा/जामताड़ा
जामताड़ा प्रखंड के डेराडीह गांव में पानी की भारी किल्लत ने ग्रामीणों की जिंदगी मुश्किल कर दी है। आदिवासी बहुल इस गांव में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं और मजबूरी में डोभा का दूषित पानी पीने को विवश हैं। हैरानी की बात यह है कि यह इलाका राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान आंसारी के विधानसभा क्षेत्र में आता है, बावजूद इसके ग्रामीण मूलभूत सुविधा के अभाव में बीमारियों को न्योता देने वाले पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में एक सोलर जलमीनार स्थापित की गई थी, लेकिन वह वर्षों से बंद पड़ी है और सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है। गांव के कुल चार चापाकलों में से दो पूरी तरह खराब हो चुके हैं, जबकि बाकी दो से भी नाममात्र का पानी निकलता है। ग्रामीणों का दर्द साफ झलकता है। उनका कहना है कि वे भी साफ पानी पीकर स्वस्थ रहना चाहते हैं, लेकिन सुविधा के अभाव में मजबूरी झेलनी पड़ रही है।

40 डिग्री गर्मी में महिलाएं खोद रहीं गड्ढे
भीषण गर्मी के बीच हालात और भी भयावह हो गए हैं। गांव की महिलाएं गोद में बच्चों को लेकर और सिर पर बाल्टी-डब्बा उठाकर खेतों की ओर जाती हैं, जहां वे जमीन खोदकर पानी इकट्ठा होने का इंतजार करती हैं। घंटों की मशक्कत के बाद जमा हुए गंदे पानी को छानकर पीने और खाना बनाने में इस्तेमाल किया जाता है। 40 डिग्री से अधिक तापमान में यह संघर्ष ग्रामीणों की पीड़ा को बयां करता है। डेराडीह गांव से सटे पुराना टोला की स्थिति भी बेहद खराब है। करीब 100 लोगों की आबादी वाले इस टोले में 4-5 चापाकल और एक जलमीनार होने के बावजूद अधिकतर संसाधन बंद पड़े हैं। जलमीनार समेत चार चापाकल पूरी तरह ठप हैं और पूरा टोला सिर्फ एक चापाकल के सहारे है। महिलाएं सुबह 4 बजे से पानी भरने के लिए कतार में लग जाती हैं, क्योंकि दोपहर तक वह चापाकल भी पानी देना बंद कर देता है। जल संकट के कारण महिलाएं कई-कई दिनों तक स्नान नहीं कर पा रही हैं।

अधिकारियों से निराश ग्रामीणों को मीडिया से उम्मीद
ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि वे कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों के पास गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। थक-हारकर ग्रामीणों ने अब मीडिया का सहारा लिया है। उनका मानना है कि अगर उनकी आवाज सरकार और प्रशासन तक पहुंचेगी, तभी इस भीषण जल संकट से राहत मिलने की उम्मीद जगेगी।