द फॉलोअप डेस्क
देश में सरकारी स्कूलों की संख्या लगातार घट रही है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में बच्चे, खासकर लड़कियां, 12वीं तक की पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रही हैं। सबसे अधिक चिंता लड़कियों को लेकर जताई गई है। शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश लेने वाली हर 100 छात्राओं में से केवल 55 ही 12वीं तक पहुंच पाती हैं। यानी 12वीं तक पहुंचने से पहले 45 छात्राएं पढ़ाई छोड़ देती हैं।

सरकारी स्कूलों की संख्या भी घटी
लोकसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक, देश में सरकारी स्कूलों की संख्या 2021-22 में 10,22,386 थी, जो घटकर 2025-26 में 10,05,245 रह गई। यानी चार वर्षों में 17,141 सरकारी स्कूल कम हो गए। 2025-26 में 12वीं तक पहुंचने वाली लड़कियों का रिटेंशन 55 प्रतिशत दर्ज किया गया। वहीं, 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करने के मामले में लड़कियां लड़कों से आगे रहीं। इस स्तर पर छात्राओं का सकल नामांकन अनुपात (GER) 75.2 प्रतिशत, जबकि छात्रों का 71 प्रतिशत दर्ज किया गया। पिछले वर्ष की तुलना में 9वीं से 12वीं तक पहुंचने वाली लड़कियों और लड़कों दोनों के आंकड़ों में मामूली सुधार भी दर्ज किया गया है।

पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिति सबसे खराब
सरकार ने कहा कि समग्र शिक्षा योजना के तहत राज्यों के बुनियादी ढांचे, मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म, परिवहन सुविधा और अन्य शैक्षणिक सहायता के लिए वित्तीय मदद दी जा रही है। इसके बावजूद मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड जैसे राज्यों में 12वीं तक पहुंचने वाली छात्राओं की संख्या सबसे कम बनी हुई है। वहीं, 9वीं से 12वीं तक बच्चों के सकल नामांकन अनुपात (GER) में गिरावट यह संकेत देती है कि माध्यमिक शिक्षा के बाद अब भी बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ाई जारी नहीं रख पा रहे हैं।