जामताड़ा:
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित धांधली की सीबीआई (CBI) जांच कराने और आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार को जामताड़ा समाहरणालय (समाहरणालय गेट) के समक्ष एक विशाल 1 दिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व भाजपा के जामताड़ा जिलाध्यक्ष सुमित शरण ने किया, जबकि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में झारखंड भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय शामिल हुए। समाहरणालय परिसर के बाहर जमा हुए सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं ने राज्य की वर्तमान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सरकार पर चौतरफा हमला बोला।

गरीब विरोधी के साथ छात्र विरोधी है सरकार!
पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र राय ने राज्य सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि "झारखंड की वर्तमान सरकार गरीब विरोधी तो पहले से ही थी, लेकिन अब यह पूरी तरह से छात्र विरोधी भी साबित हो चुकी है।" रवींद्र राय ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अपने दलालों, एजेंटों और चुनिंदा लोगों को बचाने के उद्देश्य से भर्ती घोटालों की सीबीआई जांच कराने से भाग रही है।
सरकार की कार्यशैली और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जब राज्य के युवाओं और छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय हुआ, तो उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाई। जब छात्र पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराने गए, तो प्रशासन से ज्यादा झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकर्ताओं और गुंडों ने उन पर डंडे बरसाए। विद्यार्थियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया और उल्टे उन पर ही झूठे मुकदमे दर्ज कर दिए गए।

रवींद्र राय ने दिल्ली का उदाहरण देते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर भी संवैधानिक तरीके से प्रदर्शन होते रहे हैं और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी छात्रों पर केस नहीं होने दिया। जो मुकदमे दर्ज भी हुए, उन्हें वापस लिया गया। परंतु झारखंड में संवैधानिक तरीके से आंदोलन कर रहे हजारों-लाखों नौजवानों और विद्यार्थियों पर मनगढंत मुकदमे लाद दिए गए हैं, जिन्हें तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए।
झारखंड के युवाओं को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा, "राज्य के छात्र घबराएं नहीं और पीछे न हटें। भाजपा की असीम ताकत छात्रों के पीछे हिमालय की तरह मजबूती से खड़ी रहेगी।" उन्होंने दावा किया कि परीक्षाओं में हुए घोटालों का कटरा और जांच की आंच अब सरकार के मंत्रियों तक पहुंचने वाली है, क्योंकि इसमें सभी के कोटे तय थे। हाई कोर्ट तक ने आयोग के तत्कालीन शीर्ष अधिकारियों की जमानत अर्जी पर गंभीर टिप्पणियां की हैं।
भाजपा स्पष्ट मांग करती है कि झारखंड की सभी संदिग्ध भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराई जाए, ताकि राज्य के युवाओं को न्याय मिल सके।