द फॉलोअप डेस्क, रांची:
JSSC CGL परीक्षा को लेकर जारी विवाद के बीच चयनित अभ्यर्थी और CGL में कार्यरत ASO ने रांची प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ 35-40 लाख रुपये देकर नौकरी हासिल करने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि अधिकतर चयनित अभ्यर्थियों के परिवार की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां ऐसी नहीं हैं कि वे इतनी बड़ी रकम देकर नौकरी खरीद सकें।
उनका आरोप है कि 15 सितंबर को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई में अनैतिक दबाव बनाकर परीक्षा रद्द करवाने की साजिश रची जा रही है। उनमें से एक सफल अभ्यर्थी ने कहा कि वह पश्चिमी सिंहभूम के एक आदिवासी परिवार से आते हैं। करीब 10 साल की उम्र में पेड़ से गिरने के कारण उनके पिता का निधन हो गया था। परिवार में सबसे बड़े होने के कारण उन्होंने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई पूरी की। सफल अभ्यर्थियों ने कहा कि दोषियों पर हो कार्रवाई, लेकिन जो ईमानदारी से परीक्षा पास किये हैं उनके साथ अन्याय न हो।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद मिली नियुक्ति
चयनित अभ्यर्थियों ने अपनी नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि CGL में उनकी नियुक्ति किसी की मनमर्जी से नहीं, बल्कि लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद हुई। उनके मुताबिक 4 दिसंबर 2024 को रिजल्ट जारी हुआ था। इसके बाद 17 दिसंबर 2024 को मामले में स्टे लगा और करीब एक साल तक कानूनी प्रक्रिया चली। उन्होंने बताया कि 3 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट की डबल बेंच का फैसला आने के बाद सरकार ने रिजल्ट जारी कर नियुक्ति पत्र दिया।
सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर होने के बाद उन्होंने वहां के फैसले का भी इंतजार किया। उनके मुताबिक हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगने के बाद उन्होंने अपनी पुरानी ITBP की नौकरी से इस्तीफा दिया और 21 जनवरी 2026 को CGL में योगदान दिया।
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OMR शीट लेकर पहुंचे अभ्यर्थी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभ्यर्थी अपनी OMR शीट लेकर पहुंचे। उन्होंने परीक्षा के कटऑफ और अपने प्राप्त अंकों का हवाला देते हुए पेपर लीक के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि पेपर-1 में 360 में 108 अंक क्वालिफाइंग थे, जबकि उन्हें 137 अंक मिले। पेपर-2 में हो भाषा में उन्होंने 100 में 97 अंक हासिल किए, जबकि पेपर-3 में करीब 46 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
सवाल किया कि अगर उन्हें पहले से पेपर लीक की जानकारी होती, तो परीक्षा में इतनी गलतियां क्यों होतीं। उन्होंने कहा कि जांच से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उनकी मांग है कि दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए, लेकिन पूरी परीक्षा या सभी चयनित अभ्यर्थियों को संदेह के घेरे में न रखा जाए।