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JPSC-JSSC की भर्ती में गड़बड़ी पर सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को दिखाया आईना- बाबूलाल मरांडी

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द फॉलोअप डेस्क, रांची:

JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जवाब तलब किया है। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा है कि राज्य सरकार किसी समिति से जांच कराने की जगह स्वतंत्र जांच एजेंसी से मामले की जांच क्यों नहीं कराती। यह भी सवाल किया कि क्या सरकार CBI जांच से भाग रही है। इस मसले पर अब नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि JPSC-JSSC परीक्षाओं में धांधली कर नौकरी बेचे जाने के मामले मे सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोगों और राज्य सरकार को नोटिस दिया जाना, झारखंड के छात्रों की लड़ाई के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। 

 

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आईना दिखाया!
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि केस फाइल कर स्टे कराने को राज्य सरकार ने अप्रत्यक्ष सहमति और सहयोग कर खुद को विजयी मान लिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आईना दिखा दिया है। बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश इन्क्वायरी कर सकते हैं, जांच नहीं। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फॉरेंसिक जांच की उपयोगिता पर विशेष जोर दिया है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राज्य सरकार लगातार रिटायर्ड जज से जांच कराने पर जोर दे रही थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से स्पष्ट है कि मामले की तह तक जाने के लिए महज Enquiry पर्याप्त नहीं है। अगर अब भी सरकार की आंखें नहीं खुली हैं, तो सुप्रीम कोर्ट के इस भावार्थ को समझिए और मामले की निष्पक्ष CBI जांच के लिए आगे बढ़िए।

सभी लोग जांच के दायरे में लाए जाएंगे!
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में JPSC के माध्यम से होने वाले में जूनियर जजों की बहाली  पर भी चिंता जताई है। जब देश की सर्वोच्च अदालत खुद इस बात को लेकर चिंतित है, तो इसका मतलब साफ है कि उसे भी झारखंड में JPSC-JSSC के माध्यम से हुई नियुक्तियों और उनमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका दिखाई दे रही है। JPSC-JSSC में धांधली करने वाला कोई भी व्यक्ति चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों ना हो, उसे कानून के दायरे में लाकर जवाबदेह बनाया जाएगा और दोष सिद्ध होने पर सजा दिलाई जाएगी। झारखंड के छात्रों को न्याय जरूर मिलेगा।

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