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Bihar News : वाॅकी–टॉकी और बॉडी वॉर्न कैमरा से लैस होंगी बिहार की पुलिस दीदी, मनचलों की खैर नहीं

वाॅकी–टॉकी और बॉडी वॉर्न कैमरा से लैस होंगी बिहार की पुलिस दीदी, मनचलों की खैर नहीं

द फॉलोअप डेस्क:

Bihar News: बिहार में स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने ‘पुलिस दीदी’ (Police Didi) पहल को और मजबूत करने की तैयारी की है। पिंक हेलमेट (Pink Helmet) पहने स्कूटी सवार महिला पुलिसकर्मी अब छात्राओं के बीच सुरक्षा का भरोसा बढ़ाने के साथ उनकी समस्याओं को सीधे पुलिस तक पहुंचाने में मदद करेंगी। आने वाले समय में इन पुलिस दीदियों को वॉकी-टॉकी और बॉडी वार्न कैमरे से लैस करने की योजना है। छात्राएं अपने क्षेत्र की पुलिस दीदी से सीधे शिकायत कर सकें, इसके लिए उन्हें डेडिकेटेड सिम भी उपलब्ध कराया जाएगा।

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इमरजेंसी रिस्पांस टीम से होगी इंटरटैगिंग

पुलिस दीदी टीम को इमरजेंसी सेवा डायल 112 से भी जोड़ा गया है। किसी छात्रा या महिला को तत्काल मदद की जरूरत होने पर पुलिस दीदी नजदीकी इमरजेंसी रिस्पांस पुलिस वाहन और आसपास की अन्य पुलिस दीदी टीमों से संपर्क कर सकेंगी। इसके लिए टीमों की इंटरटैगिंग की व्यवस्था की जा रही है। पुलिस दीदियां स्कूल-कॉलेज के प्राचार्य और शिक्षकों, महिला छात्रावास के वार्डन तथा कोचिंग संस्थानों के संचालकों के साथ भी लगातार संवाद करेंगी। इससे महिलाओं और बच्चियों से जुड़ी समस्याओं के साथ-साथ संवेदनशील हॉटस्पॉट की पहचान करने में मदद मिलेगी।

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राज्यभर में बनेंगी 2500 पुलिस दीदी टीम

बिहार पुलिस मुख्यालय के अनुसार, राज्यभर में करीब 5000 महिला पुलिसकर्मियों को ‘पुलिस दीदी’ के रूप में तैयार किया जाना है। इसके लिए दो चरणों में 2500 टीम गठित करने की योजना है। अब तक 1408 टीम गठित की जा चुकी हैं और इन टीमों को 1000 स्कूटी उपलब्ध कराई गई हैं। पटना को सबसे ज्यादा 360 स्कूटी मिली हैं, जबकि दूसरे जिलों में जरूरत के अनुसार औसतन 10 से 20 स्कूटी दी गई हैं। प्रत्येक स्कूटी पर महिला एएसआई या प्रशिक्षित सिपाही के नेतृत्व में महिला पुलिसकर्मी तैनात रहेंगी।

आत्मरक्षा से लेकर सीपीआर तक की जानकारी

पुलिस दीदियों को उनकी जिम्मेदारियों के लिए दो सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए सभी आईजी और डीआईजी स्तर पर शेड्यूल तैयार किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान महिला और बालिकाओं से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने के साथ आत्मरक्षा, बॉडी वार्न कैमरे के इस्तेमाल और सीपीआर जैसी जरूरी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य पुलिस दीदियों को मौके पर छात्राओं और महिलाओं की मदद के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना है।

गुंडों पर नजर, बार-बार पकड़े जाने पर गुंडा पंजी में दर्ज होगा नाम

पुलिस दीदियों की एक अहम जिम्मेदारी स्कूल-कॉलेज जाने वाली छात्राओं से संवाद कर उनके लिए सुरक्षित और निडर माहौल तैयार करना होगी। हॉटस्पॉट वाले इलाकों में वर्दी में गश्त कर पुलिस दीदियां मनचलों और शोहदों की पहचान कर कार्रवाई करेंगी। किसी शोहदे की दो या उससे अधिक मामलों में संलिप्तता सामने आने पर उसका नाम गुंडा पंजी में दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, छेड़छाड़ के मामले में किसी नाबालिग के पकड़े जाने पर उसकी काउंसिलिंग की जाएगी। अगर कोई नाबालिग बार-बार ऐसी घटनाओं में पकड़ा जाता है, तो उसका सनहा दर्ज कर सामाजिक जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी और मामले को किशोर न्याय पर्षद के समक्ष पेश किया जाएगा। इस पूरी पहल का उद्देश्य छात्राओं के बीच सुरक्षा का भरोसा बढ़ाने के साथ स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों के आसपास के संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मौजूदगी को मजबूत करना है।

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