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BCCI U-19 स्टेट चैंपियनशिप में खेलेंगी झारखंड की 2 बेटियां, मुश्किलों से लड़कर पाया मुकाम

BCCI U-19 स्टेट चैंपियनशिप में खेलेंगी झारखंड की 2 बेटियां, मुश्किलों से लड़कर पाया मुकाम

करमाटांड़/जामताड़ा:

Jharkhand Sports News: साइबर अपराध (Cyber Crime) के लिए कुख्यात रहे जामताड़ा (Jamtara) के करमाटांड़ की 2 बेटियों ने BCCI के U-19 स्टेट चैंपियनशिप में चयनित होकर कीर्तिमान स्थापित किया है। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी से जूझते हुए करमाटांड़ की पूर्णिमा कुमारी (Purnima Kumari) और लक्ष्मी कुमारी (Lakshmi Kumari) ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के U-19 स्टेट चैंपियनशिप T20 सत्र 2026-27 में अपनी जगह बनाई है। दोनों खिलाड़ी प्रतियोगिता में देवघर जिला क्रिकेट संघ (DDCA) का प्रतिनिधित्व करेंगी। पूर्णिमा कुमारी दाएं हाथ की बैटर हैं तो वहीं लक्ष्मी कुमारी एक प्रतिभाशाली ऑफ स्पिन गेंदबाज हैं। पूर्णिमा के पिता मुर्गा बेचते हैं तो वहीं  लक्ष्मी के पिता स्थानीय ढाबे में खाना पकाते हैं। 

कठिन परिस्थितियों में सपनों की ओर बढ़े कदम
​यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि दोनों खिलाड़ी बेहद ही साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं। पूर्णिमा कुमारी दाएं हाथ की प्रतिभावान बल्लेबाज हैं। उनके पिता हरिनारायण मंडल मुर्गा बेचकर किसी तरह अपने परिवार का गुजर-बसर करते हैं। आर्थिक तंगी के कारण खेल के लिए महंगे संसाधन जुटाना बेहद कठिन था, लेकिन पूर्णिमा का जुनून कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने मैदान पर घंटों पसीना बहाया, अनुशासित दिनचर्या अपनाई और अपनी मजबूत बल्लेबाजी के दम पर स्थानीय क्रिकेट से लेकर राज्य स्तरीय टीम तक का सफर तय किया।

कुशल ऑफ स्पिन गेंदबाज हैं करमाटांड़ की लक्ष्मी
दूसरी ओर, लक्ष्मी कुमारी की कहानी भी उतनी ही संघर्षपूर्ण है। उनके पिता तुलसी मंडल एक स्थानीय होटल में खाना बनाने का काम करते हैं। सीमित पारिवारिक आय के बावजूद लक्ष्मी ने क्रिकेट को ही अपना लक्ष्य बनाया। वे एक कुशल ऑफ स्पिन गेंदबाज हैं। अपनी फिरकी गेंदबाजी और मेहनत के बल पर उन्होंने चयनकर्ताओं को प्रभावित किया और देवघर जिला क्रिकेट संघ की टीम में अपना स्थान पक्का कर लिया। अब उन्हें बीसीसीआई के राज्य स्तरीय मंच पर अपनी फिरकी का जादू बिखेरने का मौका मिला है।

​जामताड़ा से निराशा मिली तो देवघर को बनाया कर्मभूमि
​दोनों खिलाड़ियों की इस सफलता के पीछे एक कठिन मोड़ भी आया। जामताड़ा की मूल निवासी होने के बावजूद, जिले में क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े विवादों और अनिश्चितता के कारण दोनों को अपने गृह जिले से खेलने के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहे थे। हालांकि, हताश होने के बजाय दोनों ने देवघर जिला क्रिकेट संघ का रुख किया। देवघर में मिले अवसरों का उन्होंने पूरा फायदा उठाया और अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर बीसीसीआई अंडर-19 स्टेट चैंपियनशिप का टिकट हासिल किया।

​कोच का प्रयास और ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए नई उम्मीद
इन दोनों खिलाड़ियों को तराशने में स्थानीय कोच निवास मंडल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने करमाटांड़ में सीमित साधनों के बीच बच्चों को क्रिकेट की बारीकियां सिखाईं। कोच निवास मंडल का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में हुनर की कोई कमी नहीं है; बस सही मार्गदर्शन, बुनियादी सुविधाएं और निष्पक्ष अवसरों की जरूरत है। पूर्णिमा और लक्ष्मी की सफलता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन मिले तो गांव की बेटियां भी बड़े से बड़े मंच पर अपनी धाक जमा सकती हैं।

​साइबर क्राइम से अलग खेल प्रतिभा की नई पहचान
पूर्णिमा और लक्ष्मी की यह सफलता केवल उनके परिवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे करमाटांड़ और जामताड़ा क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा की एक नई किरण लेकर आई है। यह कहानी संदेश देती है कि यदि ऐसी ग्रामीण प्रतिभाओं को नियमित प्रशिक्षण, बेहतर खेल मैदान और खेल सामग्री उपलब्ध कराई जाए, तो जामताड़ा की पहचान साइबर अपराध से इतर एक दिन खेल प्रतिभाओं की जननी के रूप में विश्व पटल पर स्थापित होगी।

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