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29 जुलाई को JSCA मामले की अंतिम सुनवाई करेगा BCCI लोकपाल, 4 दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट में दायर अवमानना याचिका से बढ़ी हलचल

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रांची:

झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (JSCA) की संवैधानिक वैधता एवं प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़े बहुचर्चित मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। बीसीसीआई के लोकपाल-सह-एथिक्स ऑफिसर एवं सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने शिकायत संख्या-13/2026 में यह आदेश पारित किया है कि मामले की अंतिम सुनवाई 29 जुलाई 2026 को दोपहर 12:00 बजे वर्चुअल माध्यम से की जाएगी। अपने आदेश में लोकपाल ने स्पष्ट किया है कि दोनों पक्षों की लिखित दलीलें (Pleadings) पूर्ण हो चुकी हैं तथा पक्षकारों को अंतिम सुनवाई से पूर्व संक्षिप्त लिखित प्रस्तुति दाखिल करने की स्वतंत्रता प्रदान की गई है।

बोर्ड के आजीवन सदस्य की शिकायत का मामला
यह आदेश जेएससीए के आजीवन सदस्य नंदू पटेल द्वारा 14 अक्टूबर 2025 को दायर शिकायत पर पारित किया गया है, जिसमें जेएससीए द्वारा सर्वोच्च न्यायालय एवं बीसीसीआई संविधान के अनुरूप संवैधानिक संशोधन लागू न करने तथा चुनाव कराने की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। इससे पूर्व 30 मार्च 2026 को बीसीसीआई लोकपाल ने शिकायत पर प्रथम दृष्टया संज्ञान लेते हुए कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया था। नोटिस में विशेष रूप से उल्लेख किया गया था कि शिकायत जेएससीए की संवैधानिक अनुपालना (Constitutional Compliance) तथा चुनावों के संचालन से संबंधित गंभीर मुद्दे उठाती है और संघ को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।

झारखंड राज्य क्रिकेट संघ पर आरोप क्या है!
गौरतलब है कि यह आदेश ऐसे समय आया है जब मात्र 4 दिन पूर्व, 10 जुलाई 2026 को नंदू पटेल ने जेएससीए के वर्तमान एवं पूर्व पदाधिकारियों के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा क्रिकेट प्रशासन में सुधार हेतु वर्ष 2016, 2018 एवं 2022 में दिए गए निर्देशों का जानबूझकर पालन नहीं किया गया तथा जेएससीए ने कथित रूप से एक गैर-पंजीकृत संविधान के आधार पर वर्ष 2019, 2022 एवं 18 मई 2025 के चुनाव संपन्न कराए।

अवमानना याचिका दायर होने के बाद राज्य के प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों के अनुसार, याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि चुनावों में कथित रूप से अपात्र मतदाताओं को मतदान कराया गया, चुनावी प्रक्रिया में बीसीसीआई एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन हुआ तथा हितों के टकराव (Conflict of Interest) संबंधी प्रावधानों की भी अनदेखी की गई। इन समाचारों के प्रकाशित होने के बाद क्रिकेट प्रशासन से जुड़े इस विवाद ने राज्यभर में व्यापक चर्चा का विषय बना।

क्रिकेट प्रशासन और खेल जगत में चर्चा का विषय
बीसीसीआई लोकपाल के 14 जुलाई 2026 के आदेश और उससे ठीक 4 दिन पूर्व दायर अवमानना याचिका के घटनाक्रम ने इस पूरे मामले को निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है। यद्यपि लोकपाल के आदेश में अंतिम सुनवाई तय करने का आधार केवल यह बताया गया है कि सभी पक्षों की लिखित दलीलें पूरी हो चुकी हैं, तथापि अवमानना याचिका दायर होने के तुरंत बाद अंतिम सुनवाई की तिथि निर्धारित होने से इस मामले ने क्रिकेट प्रशासन और खेल जगत का विशेष ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

29 जुलाई की सुनवाई में इन प्रश्नों पर होगा विचार
अब 29 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा के समक्ष होने वाली अंतिम सुनवाई में जेएससीए की संवैधानिक वैधता, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन, संशोधित संविधान के पंजीकरण, चुनावों की वैधता तथा बीसीसीआई संविधान के पालन जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार किया जाएगा। खेल प्रशासन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में आने वाला निर्णय केवल जेएससीए ही नहीं, बल्कि देश के सभी राज्य क्रिकेट संघों में सुशासन, पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही के लिए भी महत्वपूर्ण नज़ीर स्थापित कर सकता है।

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