द फॉलोअप टीम, रांची:
प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन (पासवा) के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने कहा कि 10वीं और 12वीं क्लास का परिणाम संतोषजनक नहीं होने के पीछे पूरी तरह से सीबीएसई बोर्ड द्वारा लिया गया फैसला जिम्मेवार है। पासवा के प्रदेश अध्यक्ष आलोक कुमार दूबे ने कहा कि विद्यालयों पर सीबीएसई द्वारा तय किए गए मापदंडों के अनुसार ही अंक प्रदान करने का दबाव था।
सीबीएसई ने स्कूलों का अधिकार सीमित किया
आलोक कुमार दुबे ने कहा कि सीबीएसई बोर्ड द्वारा सभी विद्यालयों को पहले ही विषयवार अंक प्रदान कर उनके अधिकार को सीमित कर दिया गया। इससे विद्यालय सीमित संख्या में अंक देने पर विवश थे। इस प्रकार सभी विद्यालयों को सीबीएसई के मापदंड पर ही अंक प्रदान करने पड़े। उन्होंने कहा कि तय किए गए मानदंड जोकि विगत 3 वर्षों पर आधारित था वह अलग-अलग था। अब अगर उपरोक्त विवरण के आधार पर ही विद्यालयों को अंक प्रदान करने थे तो विद्यालय कैसे कम या ज्यादा अंक दे सकते थे।

छात्रों के साथ अन्याय के लिए सीबीएसई दोषी
आलोक दूबे ने कहा सीबीएसई के द्वारा एक तय संख्या में बच्चों को उत्तरीय अनुसार नियमित विद्यालय ने ऐसा किया। अब अगर छात्रों की प्रतिभा के साथ न्याय नहीं किया गया तो इसका संपूर्ण दोष सीबीएसई पर ही जाता है ना कि विद्यालय पर। वैसे विद्यालय जिनका विगत 3 वर्षों का प्रदर्शन अच्छा था उन पर भी कम अंक देने का सीबीएसई का दबाव था। पासवा अध्यक्ष ने सीबीएसई के चेयरमैन से मांग की है कि 10वीं एवं 12वीं के बच्चों को 85% से ऊपर मार्ग लेकर उन बच्चों को मानसिक तौर पर बीमार होने से बचाएं अन्यथा किसी बच्चे के साथ कोई घटना दुर्घटना होती है एवं स्कूल संचालकों के साथ भी कोई घटना दुर्घटना होती है तो इसकी सारी जिम्मेदारी सीबीएसई की होगी।
जैक बोर्ड को हठधर्मिता छोड़ वार्ता करनी चाहिए
जैक बोर्ड द्वारा घोषित परीक्षा परिणाम पर विद्यार्थियों के हो रहे हंगामे के संबंध में आलोक दूबे ने कहा कि तत्काल इस संबंध में जैक बोर्ड के अध्यक्ष को हठधर्मिता छोड़ते हुए अभिभावकों एवं बच्चों से बातचीत कर रास्ता निकालना चाहिए इधर, झारखंड में कल से 9वीं से 12वीं क्लास तक की पढ़ाई ऑफलाइन शुरू होने पर आलोक कुमार दुबे ने कहा कि मीडिया के माध्यम से यह बात सार्वजनिक हुई है कि रांची के संत जॉन और संत पॉल समेत कई स्कूलों में सोशल डिस्टेसिंग के आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं हो रहा है एवं एक-एक क्लास में 40 से अधिक बच्चे बैठे नजर आये, इसलिए प्रबंधन से आग्रह है कि सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराया जाए।