द फॉलोअप टीम, पटना :
बिहार विधानसभा चुनाव में लोजपा की डिमांड की वजह से एनडीए में सीट शेयरिंग का मुद्दा पूरी तरह से उलझ गया है। एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान समेत पार्टी के कई नेताओं ने कार्यकर्ताओं से 143 सीटों पर तैयारी करने को कहा है। समझा जाता है कि चिराग पासवान बिना गठबंधन के चुनाव में उतरेंगे। चिराग पासवान पहले ही कह चुके हैं कि वह महागठबंधन में नहीं जाएंगे। अब अगर वह एनडीए से भी अलग होते हैं तो उनके पास क्या विकल्प होंगे। चिराग पासवान किन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं, यह बहुत जल्द मालूम चल जाएगा।
चिराग 42 सीट चाहते हैं
एनडीए में बीजेपी एलजेपी को 30-32 सीटें देने को तैयार है। हालांकि चिराग पासवान 42 सीटों से कम पर तैयार नहीं दिख रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि चिराग पासवान सीट को लेकर बुधवार को अंतिम निर्णय ले सकते हैं। बीजेपी ने चिराग से कहा है कि बुधवार शाम तक वह अपना स्टैंड क्लियर करें। अगर एलजेपी आज सीट शेयरिंग पर अपनी अंतिम राय नहीं देती है तो बीजेपी और जेडीयू अपने-अपने हिस्से की सीटों का ऐलान कर देगी।
चिराग पासवान क्या एनडीए से अलग होंगे?
चिराग पासवान के पास दूसरा विकल्प यह है कि वह एनडीए से अलग हो जाए। उसके बाद वह बिहार में उन सीटों पर प्रत्याशी ना उतारे जहां बीजेपी के उम्मीदवार होंगे। इस लिहाज से एलजेपी के ज्यादा सीटों पर प्रत्याशी उतारने का सपना भी पूरा हो जाएगा और केंद्र में बीजेपी के साथ उसका गठबंधन भी बना रहेगा। क्योंकि चिराग पासवान लगातार कहते रहे हैं कि उनका गठबंधन बीजेपी के साथ है ना कि जेडीयू के साथ। जेडीयू के नेता भी इस बात को दोहराते रहे हैं।
कुशवाहा के साथ भी जा सकते हैं चिराग!
चिराग पासवान के सामने तीसरा विकल्प यह दिखता है कि वह उपेंद्र कुशवाहा और मायावती को मिलाकर बने गठबंधन में शामिल हों। महागठबंधन से अलग होने के बाद उपेंद्र कुशवाहा एनडीए में जाना चाहते थे, लेकिन बात नहीं बन पाई। इसके बाद उन्होंने मायावती की बीएसपी के साथ गठबंधन किया है। इस गठबंधन में अगर चिराग पासवान आते हैं तो चुनाव परिणाम में कोई बड़ा फेरबदल दिख सकता है।
बिहार में करीब 16 फीसदी दलित वोटर
बता दें कि बिहार में अनुमान के मुताबिक बिहार में दलित और महादलित मिलाकर करीब 16 फीसदी वोटर हैं। वहीं बिहार में कोइरी (कुशवाहा) की कुल आबादी 6 से 7 प्रतिशत के आसपास है। इस वोट बैंक का हिसाब लगाएं तो कुल मिलाकर करीब 20-21 फीसदी होता है। इसमें करीब पांच फीसदी पासवान समाज के कोर वोटर रामविलास पासवान और चिराग पासवान का साथ देते रहे हैं।
2005 में 29 सीटें मिली थीं
साल 2005 के फरवरी में हुए चुनाव की तरह एलजेपी अकेले मैदान में उतरे। साथ ही बिहार के ज्यादातर सीटों पर प्रत्याशी उतारे। 2005 के फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान के पिता रामविलास पासवान अकेले चुनाव में उतरे थे, जिसमें उनकी पार्टी को 29 सीटें मिली थी। इस तरह वह सत्ता की चाभी हासिल करने में सफल रहे थे। अब चिराग पासवान को आज फैसला लेना है कि वह कौन सा विकल्प तलाशते हैं। कहीं चिराग इन विकल्पों के अलावा कोई नया गठबंधन तो नहीं बनाते हैं, यह देखना भी दिलचस्प होगा।