द फॉलोअप डेस्क
राज्य में नगर निकायों के चुनाव को लेकर 10 सितंबर को झारखंड हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई है। निकाय चुनाव को लेकर बुधवार को जस्टिस आनंद सेन की अदालत में होनेवाली सुनवाई को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सुनवाई के दौरान निकाय चुनाव को लेकर सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट की जाएगी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की ओर से हर हाल में दिसंबर तक चुनाव करा लेने का कोर्ट में आश्वासन दिया जाएगा। नगर विकास विभाग एवं मुख्य सचिव द्वारा अदालत में निकाय चुनाव को लेकर फ्लो चार्ट प्रस्तुत किया जाएगा। उसमें बताया जाएगा कि चुनाव कराने के लिए राज्य सरकार की ओर से अब तक क्या क्या कार्रवाई की गयी है। मसलन ओबीसी आरक्षण को लेकर ट्रिपल टेस्ट करा लिया गया है। अब मतदाता सूची का विखंडन, आरक्षण रोस्टर का निर्माण व अन्य तैयारियां शामिल है। इसके लिए राज्य सरकार कोर्ट से दिसंबर माह तक का समय मांग सकती है। वैसे आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार नवंबर तक चुनाव कराने का मन बना चुकी है। यहां मालूम हो कि निकाय चुनाव को लेकर दायर अवमानना वाद पर दो सितंबर को न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत में सुनवाई हुई थी। सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव अलका तिवारी और नगर विकास सचिव सुनील कुमार सशरीर अदालत में उपस्थित हुए थे।
नगर निकाय चुनाव को लेकर हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी किए जाने पर अदलात ने कड़ी टिप्पणी की थी। साथ ही 10 सितंबर को सुनवाई की अगली तिथि तय करते हुए अदालत ने मुख्य सचिव को चुनाव कराने के लिए टाइम लाइन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। मालूम हो कि इससे पूर्व 18 जुलाई को भी सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा था कि राज्य में संवैधानिक तंत्र फेल हो गया है। मालूम हो कि रांची नगर निगम की पूर्व पार्षद रोशनी खलखो व कई अन्य की ओर से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की गई है। इसमें कहा गया है कि चार जनवरी 2024 को झारखंड हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह में निकाय चुनाव कराने का आदेश दिया था। बावजूद निकाय चुनाव नहीं कराया जा रहा है। मालूम हो कि राज्य में ओबीसी आरक्षण को लेकर ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है। राज्य के 48 नगर निकायों में कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार सामान्य जाति के 34.82, बीसी-1 के 31.36, बीसी टू के 14.34, एससी के 11.24 एवं एसटी के 8.2 फीसदी आबादी है।
कल पेसा नियमावली पर हाईकोर्ट में सुनवाई
इधर हाईकोर्ट में पेसा नियमावली गठन को लेकर दायर जनहित याचिका पर नौ सितंबर को अगली सुनवाई है। इस दिन हाईकोर्ट द्वारा कड़ा रुख अपनाए जाने की संभावना है। राज्य सरकार को बताना है कि वह कब तक पेसा नियमावली का गठन कर लेगी। हालांकि अभी तक पेसा नियमावली पर कैबिनेट की स्वीकृति नहीं ली जा सकी है। पेसा नियमावली से जुड़े राज्य सरकार के 17 विभागों में कई विभागों ने अब तक अपना मंतव्य नहीं दिया है। मालूम हो कि पिछली सुनवाई में पंचायती राज सचिव को सशरीर उपस्थित होना पड़ा था। कल भी विभागीय सचिव को बताना है कि सरकार कब तक नियमावली को मंजूरी देगी।