logo

चंपाई सोरेन ने सूर्या हांसदा के एनकाउंटर पर खड़े किये सवाल, CBI जांच की भी कर दी मांग

champai_soren1.jpg

द फॉलोअप डेस्क
चंपाई सोरेन ने स्व. सूर्या हांसदा के एनकाउंटर के बाद सवाल खड़े कर दिए है। उन्होंने इस पर बात करते हुए कहा है कि चार बार चुनाव लड़ चुके स्व. सूर्या हांसदा की पत्नी ने देवघर में गिरफ्तारी के तुरंत बाद जिस बात की आशंका जताई थी, गोड्डा पहुंचते- पहुंचते वह सच हो गई। पिछले कुछ समय से, संथाल परगना में, कुछ खास लोगों के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को कुचलने की कोशिशें हो रही हैं। 
चंपाई सोरेन ने बताया साजिश के तहत हुई घटना
चंपाई सोरेन ने इस पर शक जताते हुए कहा कि गोड्डा में स्व. सूर्या हांसदा के तथाकथित एनकाउंटर (?) के बाद उनके परिवार के बयानों से कहीं ना कहीं यह संदेश निकल कर आ रहा है कि अगर आप इस सरकार में आदिवासियों के पक्ष में एवं खनन माफिया के खिलाफ आवाज उठाएंगे, तो सरकारी तंत्र की मदद से आपको खामोश कर दिया जायेगा। जब पुलिस किसी अभियुक्त को गिरफ्तार करती है, तो उसकी सुरक्षा भी उनकी जिम्मेदारी होती है। क्या पुलिस यह बताएगी कि हथकड़ी लगे एक बीमार व्यक्ति ने पुलिस पर कैसे और कितनी गोलियां चलाईं? वे गोलियां किसे लगीं? देवघर से गोड्डा आने के क्रम में जिस व्यक्ति ने भागने की कोशिश नहीं की, वह गोड्डा आते ही हमलावर कैसे हो गया? 
चंपाई सोरेन ने गोली लगने पर बात करते हुए कहा कि आधी रात को उसे जंगल में ले जाने की जगह सुबह का इंतजार क्यों नहीं किया गया? पुलिस की गोलियां आरोपी के पैरों की जगह सीने पर क्यों लगी? अगर किसी गिरोह ने पुलिस पर हमला किया था, जैसा कि पुलिस कह रही है, तो उनमें से किसी को भी गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा सका? उस गिरोह को कैसे पता चला कि पुलिस स्व. सूर्या हांसदा को लेकर वहाँ आने वाली है? उन में से कोई घायल क्यों नहीं हुआ? कोई बच्चा भी इस कहानी पर विश्वास करेगा क्या? 

उन्होंने आगे कहा कि किसी भी मामले के आरोपी को न्याय देने के लिए अदालतें हैं, लेकिन जब पुलिस ही साजिश में शामिल दिखने लगे, तो न्याय की मूल अवधारणा ही दम तोड़ती नजर आती है। दूसरी तरफ, हमने बोकारो में देखा कि अगर अपराधी एक विशेष समुदाय से हो, तो सरकार के मंत्री ना सिर्फ मुख्यमंत्री एवं बड़े नेताओं से अपराधी के परिवार को मदद दिलवाते हैं, बल्कि उनके आश्रितों के लिए नौकरी का भी इंतजाम करते हैं। 

अंत में चंपाई सोरेन ने CBI जांच की मांग करते हुए कहा कि आदिवासियों पर अत्याचार करने वालों को प्रोत्साहन एवं उनकी आवाज उठाने वालों को खामोश करने की यह प्रवृत्ति खतरनाक है। लेकिन अफसोस, झारखंड में राजनैतिक कारणों से यह अब सामान्य होती जा रही है। इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए, तभी सच सामने आयेगा और पीड़ित परिवार को न्याय मिल पायेगा।

Tags - jharkhand news jharkhand latest news jharkhand update jharkhand khabar champai soren surya hansda encounter news