द फॉलोअप टीम, रांची:
26 अप्रैल की रात अगरतल्ला में हुई एक शादी में डीएम शैलेश का मैरिज हॉल में घुस के मेहमानों के साथ बदतमीजी करना तो आपको याद ही होगा। मैरिज हॉल में घुसकर उपायुक्त द्वारा पंडित को थप्पड़ मारना, दूल्हे को धकियाना और औरतों के साथ बदतमीजी करना यह सब तो आपको याद ही होगा। डीएम साहब वहां कोरोना गाइडलाइन की सख्ती का पालन करवाने गए थे। उनका तरीका लोगों को पसंद नही आया। डीएम की सख्ती उन पर काफी भारी पड़ गयी। जानते हैं उनका क्या हुआ।
जानिए क्या हुआ उनके साथ
उस घटना के बाद त्रिपुरा सरकार ने इन्क्वायरी बैठाई। शैलेष कुमार यादव को वेस्ट त्रिपुरा के डीएम पोस्ट से हटाया गया और उन्हें छुट्टी पर भेजा गया। हालांकि, वो दूसरे पदों पर बने रहे है। इस संबंध में PIL और रिट पिटीशन तहाईकोर्ट में दाखिल की गई थी। 26 अप्रैल को जिन शादियों में डीएम ने छापेमारी की थी, उनमें से एक दुल्हन के पिता यह पिटीशन डाली थी। चीफ जस्टिस अकील कुरैशी और जस्टिस एसजी चट्टोपाध्याय की बेंच ने पूरे मामले को सुना। बेंच ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच हो। डीएम शैलेष कुमार यादव को अगरतला से बाहर भेज दिया जाए। उनका ट्रांसफर बेलोनिया कर दिया गया।
क्या आया था डीएम का बयान
डीएम ने पुलिस वालों को जिम्मेदार ठहराया था और उनका कहना था कि पुलिस अपनी जिम्मेदारी सही से नहीं निभाते है। उन्होंने कहा था 'मैं अभी दो अस्पताल होकर आया हूं। वहां की हालत देखी तो मैंने सोचा कि देख लेते हैं कि शहर में क्या चल रहा है। यह सब देख कर मैं हैरान रह गया। यहां पुलिस की गाड़ी खड़ी है, लेकिन फिर भी यह सब यहां चल रहा है। पुलिस भी इस पूरे कारनामे में मिली हुई है। ये लोग पढ़े लिखे हैं, लेकिन फिर भी जिम्मेदारी नहीं समझ रहे। यही लोग कोरोना फैलने पर कहेंगे कि सरकार कुछ कर नहीं रही है।
डीएम साहब ने माफी भी मांगी थी
26 अप्रैल वाली बास्त से लोगों में काफी आक्रोश था उसके बाद में डीएम शैलेष कुमार यादव ने माफी भी मांगी थी। उन्होंने कहा था कि उनके व्यवहार से किसी की भावना आहत हुई है, तो वो इसके लिए माफी मांगते हैं। उन्होंने बताया था कि उनकी मंशा केवल इतनी थी कि नियमों का सख्ती से पालन करवाया जाए।