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बेहद चौंकानेवाला रहा वामपंथियों का प्रदर्शन, तालमेल में 29 सीटें मिली, 16 पर जीत दर्ज की

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द फॉलोअप टीम, पटना :
बिहार विधानसभा चुनाव में लंबे समय के बाद वामपंथियों ने बेहद चौंकानेवाला प्रदर्शन किया है। महागठबंधन से वामदलों का तालमेल होने के बाद राज्य में उनकी शानदार वापसी हुई है। इनमें भी सबसे ज्यादा फायदे में भाकपा माले रही। वर्ष 1989 में इस पार्टी ने पहली बार बिहार में एक सीट जीती थी। इसके बाद 1990 में इसके सात विधायक चुने गए थे। इसके बाद पार्टी में फिसलन का दौर शुरू हुआ। कई उतार-चढ़ाव के बाद इस चुनाव में पार्टी ने जबर्दस्त वापसी की है। 

29 में 16 सीटों पर मिली जीत
इस बार गठबंधन में चुनाव लड़ने के लिए वामदलों को कुल 29 सीटें मिली थीं। इनमें से 16 सीटों पर उनकी जीत हुई। अकेले भाकपा माले ने ही 12 सीटें जीतीं और भाकपा एवं माकपा दो-दो सीटों पर विजयी हुईं। माकपा के चार प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें से दो जीते, जबकि भाकपा ने छह प्रत्याशी खड़े किए थे, उसे दो पर जीत मिली। 

क्या है भाकपा माले
कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी), जिसे संक्षेप में भाकपा माले या सीपीआई एमएल कहते हैं। इसका चुनाव चिन्ह आयताकार लाल झंडे पर सफेद हंसिया और हथौड़ा अंकित है। पार्टी का कार्यालय दिल्ली में है। पार्टी का दूसरा कार्यालय बिहार की राजधानी पटना में है।

निजाम के खिलाफ संघर्ष 
भारत में वर्ष 1925 में भारतीय कम्युनिट पार्टी (सीपीआई) का गठन किया गया था। सीपीआई ने हैदराबाद के निजाम के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष चलाया, लेकिन बाद में सीपीआई के समझौतावादी रुख अख्यितार करने से पार्टी में मतभेद बढ़ गया।

1964 में माकपा बनी 
वर्ष 1964 में पार्टी टूट गई और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (सीपीआई एम या मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी) का गठन हुआ। विभाजन के वक्त तमाम क्रांतिकारी सीपीआई एम में शामिल हो गए, लेकिन उसके ढुलमुल रवैये के कारण पार्टी में आंतरिक संघर्ष शुरू हो गया।

1967 में बिखराव आया
वर्ष 1967 में पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में भूमि संघर्ष छिड़ गए, जिसे दबाने के लिए संयुक्त मोर्चा सरकार ने सशस्त्र कार्रवाई की। नक्सलबाड़ी में शांतिपूर्ण जुलूस पर पुलिस ने गोलियां चलाकर 11 गरीब-भूमिहीन महिला-पुरुष-बच्चों की हत्या कर दी। 25 मई, 1967 की इस घटना के बाद सीपीआई एम विभाजित हो गई।

1969 में बनी भाकपा माले
सीपीआई (एम) से अलग होकर कम्युनिस्ट कार्यकर्ताओं ने 22 अप्रैल, 1969 को लेनिन के जन्म दिवस पर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) की स्थापना की। चारु मजूमदार पार्टी के पहले महासचिव बने थे।

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