द फॉलोअप, रांची
पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया है। उन्होंने जेएलकेएम प्रमुख जयराम महतो और बरवाअड्डा थाना प्रभारी प्रकरण पर अपना विचार व्यक्त किया है। शब्दशः-
* झारखंड पुलिस एसोसिएशन क्या शिखंडी है ?
* जयराम महतो पागल है क्या, जो गाली बकता है ?
* भगवान बिरसा मुंडा को गिरफ्तार कराने में एक झारखंडी ही शिखंडी था !
मैं सबसे पहले यहां स्पष्ट करना चाहता हूं कि झारखंड की परंपरा में, आचार- विचार में कोई गाली- गलौज का स्थान नहीं है और ऐसी हरकतों की मैं घोर निंदा करता हूं।
मुझे लगता है, झारखंड पुलिस एसोसिएशन उपनिवेशवादी शक्तियों के इशारे पर शिखंडी की भूमिका निभा रही है, और उनके द्वारा हेमंत सरकार को अल्टीमेटम दिया गया है कि विधायक जयराम महतो को 5 दिनों के अंदर गिरफ्तार किया जाए, नहीं तो... या माफी मांगे। आरोप है जयराम महतो ने बरवाअड्डा के थाना प्रभारी को गाली- गलौज किया है ? इस पर थाना में जयराम महतो के खिलाफ एफआइआर भी हो चुका है। एफआईआर करना तो थाना प्रभारी के हाथ में है। विधायक जयराम महतो और थाना प्रभारी के बीच जो गरमा- गरम बहस हुई उसका भी वीडियो वायरल हो गया। यह वीडियो किसने जारी किया? कहा जा रहा है कि पूरी वीडियो नहीं है, इसे कांट-छांट किया गया है। एक कहावत है "ताली एक हाथ से नहीं बजती"। जरूर दोनों हाथ से बजी होगी? अब यह जांच का विषय है। मामले को बिना छानबीन किए पुलिस एसोसिएशन चाहती है कि जयराम महतो को गिरफ्तार किया जाए या माफी मांगे। माननीय विधायक थाना प्रभारी से माफी मांगे, यह भी सवाल है? झारखंड क्या "अंधेर नगरी चौपट राज " है ? बिरसा मुंडा को भी गिरफ्तार कराने में कोई झारखंडी ही शिखंडी था। यह इतिहास में दर्ज है।

हमारे देश के प्रधानमंत्री मोदी जी अपने भाषण में कहते हैं, मैं रोजाना 1 किलो, 2 किलो गाली खाता हूं। प्रधानमंत्री कहते हैं कि मेरी मां को गाली दी गई। कांग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी पर भी गालियों की बौछार होती रहती है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पप्पू... और भी अनर्गल तरह की गालियां सोशल मीडिया में देखी और पढ़ी जाती है। इसके अलावे राजनीतिक क्षेत्र में नेता ,कार्यकर्ता रोजाना एक दूसरे को गालियां देते रहते हैं। थाना एक ऐसा जगह है जहां बिना गाली- गलौज के कोई काम नहीं होता है,समय कटता नहीं है। वहां तो स्कूल जैसा नैतिकता का पाठ पढ़ाया नहीं जाता। पिछले दिनों एक राजू दास नामक गेरूवा वस्त्र पहना हुआ व्यक्ति दूरदर्शन में बैठकर खुलेआम मां- बहन की गाली दे रहा था, उस पर कोई कार्रवाई नहीं। ऐसे कई उदाहरण है जिसका गिनती करना मुश्किल है। एससी- एसटी छोड़कर गाली गलौज का शायद कोई केस होता होगा , यह मेरी जानकारी में नहीं है ?
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मैं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रविंद्र कुमार महतो से अपील करता हूं कि एक जनप्रतिनिधि/ विधायक जयराम महतो बनाम झारखंड पुलिस एसोसिएशन के मामले में हस्तक्षेप करें और मामले का निष्पादन करें। आप लोग चुप क्यों हैं?
मैं मुख्यमंत्री को एक घटना बताना चाहता हूं। उस समय बिहार था। मामला 1983 की है। जुगसलाई विधानसभा के विधायक तुलसी रजक एक कार्यक्रम में मनोहरपुर गए थे। मामला मजदूरों का था। विधायक तुलसी रजक को किसी बात पर तत्कालीन सिंहभूम जिला (अब पश्चिम सिंहभूम) के मनोहरपुर थाना प्रभारी द्वारा अपमानित किया गया था, अभद्रता से पेश आया। यह मामला जब बिहार विधानसभा में पहुंचा तो बिहार के मुख्यमंत्री ने थाना प्रभारी को निलंबित करने का आदेश दिया था । उस समय के मझगांव से कांग्रेस विधायक और बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष रहे देवेंद्रनाथ चांपिया जीवित है, आप उनसे जानकारी ले सकते हैं।
अब आपको तय करना है कि विधायिका और कार्यपालिका में क्या अंतर है?
धन्यवाद,
शैलेंद्र महतो
पूर्व सांसद
