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BIT मेसरा की तीन महिला वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि, ISRO को सौंपी AI आधारित चंद्रमा अध्ययन प्रणाली

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द फॉलोअप डेस्क
रांची के बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (BIT) मेसरा की तीन महिला वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने चंद्रमा की सतह पर मौजूद क्रेटरों (गड्ढों) की पहचान और विश्लेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित एक उन्नत प्रणाली विकसित की है। इस शोध परियोजना को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को सौंप दिया गया है।

2023 में इसरो ने बीआईटी मेसरा को दी थी यह परियोजना 

बता दें कि यह परियोजना वर्ष 2023 में इसरो द्वारा बीआईटी मेसरा को दी गई थी। इसका मकसद चंद्रयान मिशनों और अन्य अंतरिक्ष अभियानों से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग कर चंद्रमा की सतह का बेहतर अध्ययन करना था। परियोजना का नेतृत्व कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संचिता पाल ने किया। रिमोट सेंसिंग एंड जियोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मिली घोष सह-अन्वेषक रहीं। वहीं शोधार्थी मीमांसा सिन्हा ने अपने पीएचडी शोध के तहत इस परियोजना को पूरा किया।

डीप लर्निंग तकनीक पर आधारित यह प्रणाली
वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह प्रणाली डीप लर्निंग तकनीक पर आधारित है। इसकी मदद से चंद्रमा की सतह पर मौजूद छोटे-बड़े क्रेटरों की पहचान की जा सकती है। साथ ही उनकी गहराई, आकार और आसपास की सतही संरचनाओं का भी विश्लेषण किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार क्रेटरों का अध्ययन चंद्रमा के भू-वैज्ञानिक इतिहास को समझने में मदद करता है।

इससे सतह की उम्र का अनुमान लगाने और भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए सुरक्षित लैंडिंग स्थल चुनने में भी सहायता मिलेगी। डॉ. मिली घोष के मुताबिक, इस परियोजना पर फरवरी 2023 में काम शुरू हुआ था और तीन वर्षों की मेहनत के बाद इसे फरवरी 2026 में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। बीआईटी मेसरा की यह उपलब्धि झारखंड और देश के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।
 

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