logo

'जय जगन्नाथ' के जयकारों से गूंजा देश, जानिए रथ यात्रा की खासियत और रथों की पहचान

rath_yatra1.jpg

द फॉलोअप डेस्क

आज पूरे देश में भगवान जगन्नाथ की भक्ति का अद्भुत माहौल है। चारों ओर श्रद्धा और उत्साह की लहर दौड़ रही है। भक्तों के मुख पर “जय जगन्नाथ” की धुन गूंज रही है और हर कोई इस पावन अवसर का साक्षी बनने को व्याकुल है। यह अवसर है भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा का, जिसका शुभारंभ आज देशभर में हो रहा है। भगवान जगन्नाथ को उनके बड़े भाई बलराम (बलभद्र) और बहन सुभद्रा के साथ पूजा जाता है। यह रथ यात्रा सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और अध्यात्म का जीवंत प्रतीक है।

रथ यात्रा क्यों मनाई जाती है?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, हर वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ अपनी मौसी के घर जाते हैं। इसी यात्रा को "जगन्नाथ रथ यात्रा" कहा जाता है। इसके लिए तीन भव्य और विशाल रथ बनाए जाते हैं, जो न केवल दर्शनीय होते हैं बल्कि प्रत्येक का रंग और नाम अलग होता है। इन रथों को देखने मात्र से ही भक्तों के मन में उल्लास भर जाता है और उनकी श्रद्धा और गहरी हो जाती है।
रथों की कैसे की जाती है पहचान?
तीनों रथों की पहचान उनके रंगों और आकार से की जाती है। बलराम जी का रथ "तालध्वज" कहलाता है, जो लाल और हरे रंग का होता है और उनके पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। देवी सुभद्रा का रथ "दर्पदलन" या "पद्म रथ" कहलाता है, जो काले या नीले और लाल रंग का होता है, यह उनकी शांति और सौम्यता का प्रतीक है। वहीं भगवान जगन्नाथ का रथ "नंदीघोष" या "गरुड़ध्वज" कहलाता है, जो लाल और पीले रंग में बना होता है और भगवान की विशालता, करुणा और लोककल्याण की भावना को दर्शाता है।

जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि वह पावन क्षण है जब भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं। जैसे-जैसे रथ आगे बढ़ते हैं, भक्तों की आस्था भी साथ-साथ चलती है और उनके मन में यह विश्वास और गहरा होता है कि भगवान उनसे दूर नहीं, बल्कि सदा उनके साथ हैं। 

 

Tags - Jagannath rath yatra Story latest Story of Jagannath rath yatra latest Updates Jagannath rath yatra news latest Why Jagannath rath yatra is celebrated Jagannath rath yatra Updates latest updates Latest updates in hindi latest Jagannath rath yatra