रांची
झारखंड में आज आयोजित ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’ को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संदेश जारी कर सभी आदिवासी भाई-बहनों को शुभकामनाएं दी हैं। 29 अगस्त 2026 को जारी पत्र में उन्होंने संदेश में कहा कि वह रैली में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं, लेकिन आदिवासी समुदाय के अधिकार, पहचान और सम्मान की रक्षा की लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़े हैं।
आदिवासी एकता महाजुटान को दी शुभकामनाएं
राहुल गांधी ने अपने संदेश की शुरुआत ‘जय जोहार’ से करते हुए कहा, “आप सभी भाई-बहनों को ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’ की हार्दिक शुभकामनाएं।” उन्होंने कहा कि वह आज रैली में उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं, लेकिन अपने अधिकारों, पहचान और सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट हुए सभी लोगों के साथ मजबूती से खड़े हैं।
जयपाल सिंह मुंडा के संघर्ष को किया याद
राहुल गांधी ने झारखंड के इतिहास और आदिवासी समाज के संघर्ष का जिक्र करते हुए जयपाल सिंह मुंडा को याद किया। उन्होंने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा ने संविधान सभा में आदिवासियों की आवाज को बुलंद करने और उनके अधिकारों को संवैधानिक सुरक्षा दिलाने के लिए संघर्ष किया था।
जल-जंगल-जमीन पर समुदायों की मजबूत आवाज की वकालत
अपने संदेश में राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस के लिए आदिवासी अधिकार सर्वोपरि रहे हैं। उन्होंने पांचवीं अनुसूची, PESA और वन अधिकार कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका आधार यही सोच है कि जल-जंगल-जमीन की रक्षा करने वाले समुदायों को अपने संसाधनों पर सबसे मजबूत आवाज मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास का मतलब विस्थापन नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों की भागीदारी, सहमति और सम्मान के साथ प्रगति होना चाहिए।.jpeg)
प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी
राहुल गांधी ने कहा कि झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों पर यहां के लोगों की सार्थक भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने जल-जंगल-जमीन की लड़ाई को केवल संसाधनों की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान, अस्मिता और अधिकार की लड़ाई बताया।