फॉलोअप डेस्क
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को नॉर्थ-ईस्ट में 90,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के रोड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की घोषणा की। इनमें गुवाहाटी, शिलांग और सिलचर को जोड़ने वाले हाई-स्पीड कॉरिडोर और मेघालय में बॉर्डर कनेक्टिविटी से जुड़े अहम प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। गडकरी द्वारा शुरू की गई यह परियोजना असम के लिए विशेष महत्व रखती है। बेहतर सड़क संपर्क से असम की कनेक्टिविटी मणिपुर समेत पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के साथ और मजबूत होगी, जिससे व्यापार, पर्यटन और माल परिवहन को नई गति मिलेगी। राज्य के कृषि, चाय, पेट्रोलियम और अन्य औद्योगिक उत्पादों की आवाजाही आसान होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा। इसके अलावा, बेहतर बुनियादी ढांचे से निवेश आकर्षित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और असम को पूर्वोत्तर के प्रमुख आर्थिक प्रवेशद्वार के रूप में और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

नॉर्थ ईस्ट इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर समिट
शिलांग में 'लारिटी इंटरनेशनल सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स एंड कल्चर' में आयोजित 'नॉर्थ ईस्ट इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर समिट एंड एग्ज़िबिशन (NEIINFRA) 2026' में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स का मकसद आर्थिक विकास को तेज़ी देना, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना और बॉर्डर वाले इलाकों तक पहुंच को मज़बूत करना है। प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स में डालू, वाघमारा और दारुगिरी को जोड़ने वाला 136 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर भी शामिल है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 4,000 करोड़ रुपये है। उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के पास वेस्ट गारो हिल्स और साउथ गारो हिल्स में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा। गडकरी ने कहा कि ज़रूरी मंज़ूरी मिलने के बाद इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा।
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4 घंटे से घटकर लगभग 2 घंटे रह जाएगा
उन्होंने कहा, "यह प्रोजेक्ट भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के पास के दूर-दराज़ के गांवों तक कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा और यात्रा के समय को काफी कम कर देगा।" उन्होंने बताया कि डालू से वाघमारा और वाघमारा से दारुगिरी के बीच यात्रा का समय 4 घंटे से घटकर लगभग 2 घंटे रह जाएगा। मंत्री ने प्रस्तावित चार-लेन वाले ग्रीनफील्ड शिलांग-सिलचर कॉरिडोर का भी ज़िक्र किया, जो शिलांग के पास मावलिंगखुंग को असम के कछार ज़िले के पंचग्राम से जोड़ेगा। 23,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट के, ज़मीन अधिग्रहण से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान के बाद शुरू होने की उम्मीद है।
