द फॉलोअप डेस्क
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) राउरकेला के रिसर्चर्स ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)-बेस्ड ऑटोमैटिक सिस्टम बनाया है। यह सिस्टम ज़रूरत पड़ने पर ही सोलर पैनल की निगरानी और सफाई कर सकता है। यह एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे सोलर पावर प्लांट की क्षमता बढ़ सकती है और साथ ही मेंटेनेंस का खर्च और पानी की खपत भी कम हो सकती है। इस इनोवेशन का नाम "सोलर प्लांट की निगरानी और सफाई के लिए फेडरेटेड लर्निंग-बेस्ड ऑटोमैटिक सिस्टम और तरीका" है और इसे भारतीय पेटेंट मिला है। इस टेक्नोलॉजी को कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रो. अरुण कुमार, प्रो. बिभुदत्त साहू और रिसर्च ग्रेजुएट डॉ. लोपामुद्रा होता और डॉ. बिराजा प्रसाद नायक ने मिलकर विकसित किया है।
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स्मार्ट तरीके से निगरानी करने में मदद करेगा
यह सिस्टम फेडरेटेड लर्निंग (FL) का इस्तेमाल करता है, जो एक एडवांस्ड AI तरीका है। यह डेटा की प्राइवेसी बनाए रखते हुए सोलर पैनल की स्मार्ट तरीके से निगरानी करने में मदद करता है। आम सिस्टम के उलट, जो रॉ ऑपरेशनल डेटा को सेंट्रल सर्वर पर भेजते हैं, NIT राउरकेला की टेक्नोलॉजी सिर्फ़ एन्क्रिप्टेड जानकारी शेयर करती है। इससे साइबर सिक्योरिटी का खतरा, बैंडविड्थ का इस्तेमाल और प्राइवेसी से जुड़ी चिंताएं कम हो जाती हैं। रिसर्च टीम के अनुसार, धूल, पक्षियों की गंदगी और इंडस्ट्रियल प्रदूषण सोलर पैनल की क्षमता को 40 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं, खासकर सूखे इलाकों में बने बड़े सोलर फार्म में। सफाई के मौजूदा तरीकों में अक्सर ज़्यादा मेहनत और पानी लगता है और ये पैनल की असल हालत के बजाय तय शेड्यूल पर आधारित होते हैं।

इस तकनीक से करेगा काम
नया बना सिस्टम अपने-आप गंदगी जमा होने का पता लगाता है, उन पैनल की पहचान करता है जिन्हें मेंटेनेंस की ज़रूरत है और सिर्फ़ ज़रूरत पड़ने पर ही चुनिंदा पैनल की सफाई करता है। यह प्लांट के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए एज कंप्यूटिंग, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और ऑटोमैटिक फॉल्ट डिटेक्शन को भी शामिल करता है। फिलहाल टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL)-3 पर सिमुलेशन के ज़रिए इसे टेस्ट किया गया है। रिसर्चर्स IoT सेंसर वाला हार्डवेयर प्रोटोटाइप बनाने और सरकारी एजेंसियों व इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ मिलकर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना बना रहे हैं।
