logo

रथ यात्रा : अलग तिथि पर ISKCON के आयोजन से नाराज ओडिया समाज, जगन्नाथ परंपरा के सम्मान की उठी मांग

RATH0028.jpg

द फॉलोअप डेस्क 

ओडिया समुदाय के सदस्यों ने पुरी में मान्य पारंपरिक कैलेंडर या तिथियों से हटकर ISKCON द्वारा रथ यात्रा उत्सव आयोजित करने पर कड़ी नाराजगी जताई। ओडिया समुदाय के सदस्यों ने इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) द्वारा पुरी में पालन किए जाने वाले पारंपरिक कैलेंडर या तिथियों से हटकर रथ यात्रा उत्सव आयोजित करने पर कड़ी नाराजगी जताई। ओडिशा फोरम ने कहा कि पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर द्वारा पालन की जाने वाली तय तिथि के बाहर रथ यात्रा मनाना सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं का अनादर है। उन्होंने दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही।

धार्मिक ग्रंथों की पवित्रता बनाए रखना

फोरम ने इस बात पर जोर दिया कि वार्षिक उत्सव की तय तारीखें ऐतिहासिक और धार्मिक ग्रंथों की व्यवस्थाओं मंि गहराई से जुड़ी हुई हैं। फोरम का तर्क है कि क्षेत्रीय सुविधा के लिए इन तारीखों से हटना विरासत की सांस्कृतिक अखंडता को कमजोर करता है। ओडिशा फोरम के अध्यक्ष गोकुल पटनायक ने जोर देकर कहा कि इन रीति-रिवाजों की पवित्रता की रक्षा के लिए दुनिया भर में बसे ओडिया लोगों को एक साथ आना चाहिए। संगठन ने घोषणा की कि वह ISKCON द्वारा किए जा रहे बदलावों से जगन्नाथ संस्कृति की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस मामले को उच्च प्रशासनिक स्तर पर औपचारिक रूप से उठाएगा।

UNESCO से मान्यता की अपील

ओडिशा फोरम ने पुष्टि की कि वह जल्द ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन सौंपेगा। प्रतिनिधिमंडल की योजना केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने और उत्सव की पारंपरिक समय-सारणी के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की मांग करने की है। ओडिशा फोरम के अध्यक्ष गोकुल पटनायक ने कहा, "हम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन सौंपने जा रहे हैं। इसके माध्यम से हम भारत सरकार से अनुरोध कर रहे हैं कि रथ यात्रा को UNESCO के तहत 'मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत' घोषित किया जाए।"


 

Tags - jagannath tradition iskcon odisha culture